“लोकतंत्र खतरे में है, देश मे अघोषित आपातकाल लगा हुआ है, देश मे असहिष्णुता बढ़ गई है”… बड़े-बड़े बुद्धिजीवियों, महागठबंधन के नेताओं, स्वघोषित निष्पक्ष पत्रकारों के मुँह से पिछले 3 सालों में ये सारे वाक्य आपने बहुत बार सुने होंगे। अगर हाल ही की बात करें तो पिछले महीने बंगाल में महागठबंधन की रैली में ममता बनर्जी ने कहा था कि हम सब ‘लोकतंत्र बचाने’ के लिए इकट्ठा हुए हैं। उन्होंने आगे कहा था सरकार ने अघोषित आपातकाल लगा रखा है, ऐसी तानाशाही ताकतों को उखाड़ कर फेंकना होगा।

चलिए विश्लेषण करते हैं कि लोकतंत्र खतरे में है या खतरे के निशान से कितना ऊपर है?

आज सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चिटफंड घोटाले की जाँच के लिए बंगाल गयी सीबीआई को बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। विडम्बना देखिये बार-बार पूछताछ के लिए बुलाने पर भी राजीव कुमार नहीं गए, तब लोकतंत्र खतरे में नहीं पड़ा? एक CM सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो रही जांच में धरने के ज़रिए अड़ंगा डाल रही हैं तब लोकतंत्र खतरे में नहीं पड़ा? CBI अधिकारियों को हिरासत में लेने से लोकतंत्र खतरे में नहीं पड़ा?

यकीन मानिए पश्चिम बंगाल, स्वतंत्र भारत का ही हिस्सा है। वहाँ पर भारत का ही संविधान लागू होता है। वैसे भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार ही हुआ है कि राज्य सरकार ने CBI अधिकारियों को उन्हें काम करने से रोका हो और ना रुकने पर गिरफ्तार कर लिया हो। हालांकि पश्चिम बंगाल के अलावा और भी कई राज्य हैं जहाँ CBI की एंट्री पर बैन लगा हुआ है। ऐसे में अगर CBI अधिकारियों की दूसरे राज्यों से भी गिरफ्तारी की खबरें आए तो चौंकिएगा मत। ठीक यही बात रोहित सरदाना ने भी कही है।

अब एक तरफ आप नरेंद्र मोदी को देखिए और दूसरी तरफ ममता बनर्जी को। जब गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी थे तो सीबीआई जाँच के दौरान लगातार पूछताछ में शामिल होते थे और जाँच में सहयोग करते थे। मोदी को सालों तक 10-10 घण्टे बिठा कर पूछताछ की गई पर उन्होंने कभी सीबीआई को गुजरात मे घुसने पर या उनके किसी काम मे रोक नहीं लगाई क्योंकि उनको भरोसा था जीत सच्चाई की होगी और हुई।

सिर्फ यही नहीं 2014 के लोकसभा चुनावों के नतीजे आ चुके थे, देश के होने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शपथग्रहण में कुछ 48 घंटे बाकी थे। ऐसे में उन्हें इशरत केस में पूछताछ के लिए समन मिला था उसकी तारीख थी। वो दृश्य याद है जब मोदी चुपचाप पूछताछ कक्ष के बाहर खड़े थे? वो भी तब जब मोदी जबरदस्त बहुमत से चुनाव जीत चुके थे। कोई और नेता होता तो आप सोच भी नही सकते कि वो पूछताछ के लिए इस तरह हाजिर होता। खैर…

एक वो दृश्य याद कीजिये, और दूसरी तरफ आज कमिश्नर से पूछताछ करने गयी सीबीआई टीम पर ममता बनर्जी की कार्यवाही देख लीजिए। खुद सोचिए लोकतंत्र का गला कौन घोंट रहा है?

देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ हैं कि किसी राज्य में राज्य की ही पुलिस मशीनरी से सीबीआई दफ्तर को बचाने के लिए CRPF की टुकड़ी लगाई गई हो। मात्र इस घटना से आप समझ सकते हैं कि ममता बनर्जी किस तरह से तानाशाही रवैया अपना कर सवैधानिक संस्थाओं को तबाह करने पर तुली हैं। यह गलत परम्परा भारत के संघीय ढांचे पर करारा प्रहार हैं।

अब कमाल की बात देखिए, जो लोग आए दिन लोकतंत्र बचाने के लिए सड़कों पर उतरते हैं आज वही सब ममता बनर्जी के समर्थन में खड़े हैं। आइए जानते हैं ये कौन लोग हैं? खनन घोटाले के आरोपी अखिलेश यादव, भ्रष्टाचार के आरोप में जमानत पर बाहर राहुल गांधी, स्मारक घोटाले की आरोपी मायावती, जेल में बंद चारा घोटाले के आरोपी लालू यादव, विश्व के सबसे ईमानदार नेता केजरीवाल जी।

 

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