ऑनलाइन फ़ूड वेबसाइट जोमेटो पर मध्यप्रदेश के पंडित अमित शुक्ल नाम के एक शख़्स ने खाना ऑर्डर किया और जब उन्हें मैसेज के जरिए पता चला कि एक मुस्लिम डिलीवरी ब्वॉय उनका खाना लेकर आ रहा है तो उन्होंने जोमेटो से डिलीवरी ब्वॉय बदलने को कहा। जोमेटो ने जब इससे मना कर दिया अमित शुक्ल ने ऑर्डर कैंसिल कर दिया और जेमोटो से रिफंड देने की मांग की। जोमेटो कंपनी ने रिफंड देने से भी इनकार कर दिया जिसके बाद दोनों के बीच सोशल मीडिया पर ही विवाद शुरू हो गया।

कस्टमर अमित शुक्ल ने जोमैटो के डिलीवरी बॉय से खाना लेने से मना कर दिया क्योंकि खाना पहुँचाने वाला मुस्लिम था। वजह यह थी कि श्रावण के महीने में वह गैर-हिन्दू के हाथ से खाना नहीं स्वीकार करना चाहता था। अमित ने जोमेटो पर आरोप लगाया कि कंपनी मुस्लिम युवक से जबरदस्ती खाना डिलीवरी करवाने की के लिए दबाव बना रही है। अमित द्वारा शेयर किए गए व्हाट्स ऐप चैट में साफ दिख रहा है कि वह जोमेटो कंपनी से कह रहा है कि अभी हमारे लिए सावन चल रहा है और इसलिए हमें किसी मुस्लिम शख़्स से डिलीवरी की कोई जरूरत नहीं है। इसके नीचे की चैट में जोमेटो कंपनी की तरफ से जो जवाब आया है उसमें कंपनी कह रही है कि अगर वो ऑर्डर कैंसिल करते हैं तो उन्हें कैंसिलेशन चार्ज के तौर पर 237 रुपये देने होंगे। इस पर कैंसलेशन फ़ीस काटना ज़ोमाटो का हक़ था, जो उन्होंने काटी। इस बात अमित शुक्ला सहमत भी हो गया था। अमित ने जोमैटो से कहा कि वो मुझ पर इस तरह खाना लेने के लिए दबाव नहीं बना सकते हैं और मुझे रिफंड की कोई जरूरत नहीं है।

पंडित अमित शुक्ल के आरोप के बाद जोमैटो ने ट्वीट कर बताया कि ”फूड का कोई धर्म नहीं होता है ये खुद में एक धर्म है।”

अमित शुक्ला ने ऑर्डर कैंसिल किया जो उनका हक था, जोमैटो ने कैंसलेशन चार्ज वसूला जो उनका हक था। यहाँ तक सब सही था। इसके आगे जोमैटो ने जो नैतिकता का ज्ञान दिया वो गैर ज़रूरी था।

Zomato के नैतिक उसूल कितने खोखले हैं। इसकी नज़ीर देखिए, जब एक मुसलमान ने गैर-हलाल खाने के लिए शिकायत की तो ज़ोमाटो उसके चरणों में गिर गया। उस समय उसके ‘नैतिक मूल्य’ गायब हो गए, जबकि हलाल-गैर-हलाल का मुद्दा भी उतना ही मज़हब और आस्था का विषय है, जितना श्रावण मास में एक हिन्दू को खाना पहुँचाने वाले का हिन्दू होना या न होना है।

इसके अलावा आपको याद पिछले वर्ष 2018 में जोमैटो के एक डिलीवरी बॉय ने कस्टमर को झूठा खाना खिलाया था। ज़ोमेटो और उसके डिलीवरी वाले खाना जूठा करके देने में जाने जाते हैं। और समुदाय विशेष के लोग हाल ही में मंदिर के प्रसाद में ज़हर मिलने की साज़िश में पकड़े गए है। ऐसे में अमित शुक्ला का ऑर्डर कैंसिल करना कहाँ से गलत हो गया।

अब एक तथाकथित सेक्युलर पत्रकार का ट्वीट देखिए। ये ज्ञानी पुरूष कह रहे हैं की अमित शुक्ला तुम्हारे जैसी सड़ी गली मानसिकता वाले कुछ नफ़रती नमूने आज भी हमारे ख़ूबसूरत मुल्क🇮🇳 पर बदनुमा धब्बे की तरह चिपके हुए हैं।

हमनें आपको कुछ दिनों पहले बताया था कि एक राजनेता ने खुले मंच से हिन्दुओं का आर्थिक बहिष्कार करने की अपील की थी। उस समय यही सेकुलर पत्रकार हमेशा की तरह नदारद थे।