आज जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले के अवंतीपोरा सेक्टर में बहुत बड़ा आतंकी हमला हुआ। इस हमले में अभी लगभग 42 जवानों की शहादत हो चुकी है, जबकि बाकी गंभीर रूप से घायल जवान अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। आज पूरा देश रो रहा है और सभी भारतीयों का खून खौल रहा है।

यह हमला जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर गोरीपोरा इलाके में हुआ है। आमतौर पर यह रास्ता बंद रहता था, लेकिन हाल ही में स्थानीय नेताओं ने यह कहते हुए रास्ता खुलवाया था कि नागरिकों को घूमकर जाने में परेशानी होती है। और हमले में आतंकियों ने स्थानीय लोगों की मदद से इसी रास्ते को हमला करने के लिए निशाना बनाया।

बहरहाल हम बात करना चाहते हैं अपने देश में रह रहे ऐसे लोगों की मानसिकता की जो जवानों की शहादत पर ताली पीटते हैं। वे खाते-पीते भारत का, भारत की हवा में ही सांस भी लेते हैं, लेकिन देश का दुर्भाग्य देखिए कि उनकी रक्षा के लिए अपने परिवारों की फिक्र किए बगैर सरहद पर डटे सैनिकों की जब शहादत होती है, तो उनका दिल खुश हो जाता है। खुशी मनाने वाले आप सिर्फ उन्हीं लोगों के बारे में जानते हैं, जिन्हें मीडिया ने प्लेटफॉर्म देकर नेता बना दिया है। लेकिन ऐसी लोगों की संख्या इस देश में हजारों-लाखों की तादाद में है।

फेसबुक पर जब समाचार चैनलों का बहस प्रसारित हो रहा था, तो ‘एक समुदाय विशेष’ के लोगो ने हंसी की प्रतिक्रिया दी और खुशी जाहिर करते हुए टिप्पणी भी किया। आपको लगेगा कि ये सभी लोग पाकिस्तान के हैं। जी नहीं! ये घटिया किस्म के लोग उसी देश के हैं, जहां आप और हम रहते हैं। ये उन्हीं वाहनों और रेलगाड़ियों में सफर करते हैं, जिसमे आप और हम करते हैं। हमारे देश की मीडिया ऐसी है कि आपको इनके बारे में कुछ नहीं बताएगी, जब तक कि आप खुद इनकी असलियत जानने की कोशिश न करें।

अब आप कहेंगे कि वो जम्मू कश्मीर के हैं, क्योंकि वे ही लोग सैनिकों पर पत्थर बरसाते हैं। तो यहां आप थोड़ा सही हैं, लेकिन इनमे सिर्फ कश्मीर के नहीं, देश के बाकी हिस्सों महाराष्ट्र, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल के भी हैं।

इसके अलावा आपको यह जानकार ताज्जुब होगा कि इनमें जो कश्मीरी हैं, वो देश के दूसरे हिस्सों में उच्च शिक्षा के लिए प्रवेश भी लेते हैं। दिल्ली, मुंबई और भोपाल जैसे शहरों में रहकर पढ़ाई करते हैं और घूमने भी आते हैं।

कहां से मिलती है इन्हें इतनी हिम्मत?

इसका सीधा जवाब है- देश के छद्म धर्मनिरपक्ष राजनेता। क्योंकि जब हम ऐसे लोगों कि बात खुलेआम करना शुरू करते हैं, तो इनके समर्थन में सिर्फ कश्मीर ही नहीं, देश के तमाम राजनीतिक दल, मानवाधिकार संगठन, कार्यकर्ता, पत्रकार, सिने जगत, शिक्षाविद से जुड़े लोग खड़े हो जाते हैं। इतना ही नहीं, इनके समर्थन में तो सेमिनार, रैलियां आदि भी आयोजित होने लगती हैं। पिछले महीने पश्चिम बंगाल में बीजेपी के एक नेता की पत्नी से दुष्कर्म होने पर इन्हीं लोगों ने खुशियां मनाईं थीं। खैर, इस पर कुछ घटिया किस्म की मानसिकता वाले लोग यह कहकर टाल जाएंगे कि बीजेपी नफरत की राजनीति करती है, इसलिए उन मासूमों ऐसी प्रतिक्रिया दी। लेकिन क्या ऐसी ओछी सोच रखने वाले ये बताएंगे कि हमारे बहादुर जवान किस प्रकार की नफरत फैला रहे थे? हमारे जवान किन दो धर्मों के बीच दीवार खड़े कर रहे थे? उनके पास इसका जवाब नहीं होगा।

आखिर में हम यही कहेंगे कि सरकार जैसे आतंकियों और पत्थरबाजों का इलाज करती है, वैसे ही भारतीय देशभक्तों की आड़ में छिपे इन आतंकियों का भी इलाज करे। आज किसी औरत की गोद सुनी हो गई, किसी का सुहाग उजड़ गया, तो छोटे छोटे मासूमों के सिर से पिता का साया उठ गया और कुछ लोग इसपर खुशियां मना रहे हैं।

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