चुनाव पूर्व पार्टियाँ घोषणापत्र जारी करती तो है लेकिन इनमें किये गये वादों को सत्ता में आने के बाद पूरा किया हो ऐसा ना के बराबर देखने को मिलता है| लोकलुभावने वादों वाले ये घोषणापत्र चुनाव के बाद अक्सर पार्टी कार्यालयों में धूल फांकते, नालियों में बहते और कचरापात्र में सड़ते हुए देखे जा सकते है|

आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी का घोषणापत्र रिलीज़ हो चूका है| लम्बा चौड़ा घोषणापत्र जिसमें कांग्रेस पार्टी सत्ता में आती है तो किस क्षेत्र में क्या करेगी, विस्तृत विवरण है| कांग्रेस ने “न्याय” योजना को अपने घोषणापत्र में प्रमुखता दी है और इसे विस्तृत तरीके से समझाया भी है| किसानों के लिए कर्जमाफी सहित कर्ज ना चुका पाने की स्थिति में उसके खिलाफ अपराधिक मुकदमे से निजात दिलाने का भी वादा किया है| आधार को लेकर बायोमेट्रिक जाँच को सरल और सुगम बनाने का भी वादा किया है|

लेकिन कांग्रेस पार्टी के इस घोषणापत्र में उनकी कोई नई रणनीति या नई घोषणा नजर नहीं आई| बार बार कहा गया कि यूपीए सरकार की उन योजनाओं को वापस लागू किया जायेगा जो एनडीए सरकार ने बंद कर दी थी| इससे साफ़ हो जाता है कि कांग्रेस अपने पुराने अंदाज में ही चुनाव लड़ने के मूड में नजर आ रही है| ऐसे में कांग्रेस के लिए इस घोषणापत्र के सहारे चुनाव जीतने की संभावनाएं भी कम हो जाती है|

कुछ मामलों में देखा जाये तो कांग्रेस के घोषणापत्र ने गेंद एकबार फिर एनडीए के पाले में डाल दी है| विशेषकर भारतीय दंड संहिता की धारा 124A जो की देशद्रोह के अपराध को परिभाषित करती है और सशस्त्र बलों (विशेष शक्ति) 1958 को ख़त्म करने का वादा किया है और इसमें बताया गया है कि जम्मूकश्मीर में सशस्त्र सुरक्षा बल मानवाधिकारों का हनन करते है और वहां की महिलाओं के साथ यौन शोषण और अपहरण जैसी घटनाओं को अंजाम देते है| साथ ही कहा गया कि कश्मीर घाटी से सुरक्षा बलों की संख्या कम कर दी जाएगी| कांग्रेस पार्टी के घोषणापत्र की ये वो बातें है जो एनडीए इनको भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी|

आइये आपको बताते है कांग्रेस के मेनिफेस्टो के वो बड़े मुद्दे जिन्हें एनडीए अपना चुनावी हथियार बना सकती है-

1.  देशद्रोह के कानून को ख़त्म करने की बात: कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणापत्र में साफ़ कहा है कि यूपीए की सरकार बनती है तो भारतीय दंड संहिता की धारा 124A को ख़त्म कर दिया जायेगा जो देशद्रोह के अपराध को परिभाषित करती है|

एनडीए को यह बड़ा मुद्दा मिल गया है है यूपीए पर हमला करने के लिए| देशद्रोह के कानून को अगर ख़त्म कर दिया गया तो देश के अन्दर रह रही देशविरोधी ताकतों को और अधिक बल मिल जायेगा|

2. AFSPA को ख़त्म करने की बात: कांग्रेस पार्टी ने वादा किया है कि उनकी सरकार आते ही AFSPA यानि सशस्त्र सुरक्षा बलों को दिए जाने वाले विशेषाधिकारों 1958 कानून को ख़त्म कर दिया जायेगा| साथ ही घोषणापत्र में स्वीकार किया गया है कि भारतीय सेना जम्मूकश्मीर कश्मीर में यौनशोषण और अपहरण जैसे कार्य करती है| इसको भी बीजेपी बड़ा मुद्दा बना सकती है| अभी तक कुछ लोग दबी आवाज में सेना पर यौनशोषण जैसे आरोप लगाते आये है लेकिन कांग्रेस ने तो अपने घोषणापत्र में ही इसका जिक्र करते हुए सेना पर फिर से सवाल उठाये है|

दूसरी तरफ कांग्रेस कहती है कि जम्मूकश्मीर में सेना की संख्या में कमी करने की बात करती है तो फिर देश में आतंकवाद घटनाओं के बढ़ने की संभावनाएं और ज्यादा बढ़ जाएगी| क्योंकि पिछले कुछ आतंकवादी हमलों में स्थानीय लड़कों की भुमिका काफी रही है|

3. धारा 370 नहीं हटाने को लेकर: कांग्रेस ने वादा किया है कि जम्मूकश्मीर में धारा 370 के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी ऐसे में कांग्रेस ने एनडीए को एक और बड़ा चुनावी मुद्दा तोहफे में दे दिया है| 2014 में एनडीए को धारा 370 हटाने के वादे पर खूब वोट दिए थे लेकिन एनडीए सरकार यह वादा निभाने में असफल रही और मोदी सरकार को इस मुद्दे पर घेरा जा सकता था लेकिन कांग्रेस ने तो धारा 370 ना हटाने का वादा करके मानो मोदी सरकार को संजीवनी दे दी है|

4. न्याय योजना: कांग्रेस पार्टी की न्याय योजना में भारत के 25 करोड़ लोगों को 6000 रुपये प्रतिमाह देने का वादा तो किया गया है लेकिन राजस्थान, मध्यप्रदेश और छतीशगढ के विधानसभा चुनावों में युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने का वादा करने वाली कांग्रेस सत्ता में आने के बाद अपना वादा भूल गई है| ऐसे में एनडीए के पास कांग्रेस को न्याय के मामले में घेरने के लिए ये राज्य एक अच्छा उदहारण हो सकते है|

5. किसान कर्जमाफी: राजस्थान, मध्यप्रदेश और छतीशगढ में किसानों से 10 दिन में 2 लाख तक का कर्ज माफ़ करने का वादा करके सत्ता में आने के बाद कर्ज माफ़ी में असफल रही है| ऐसे में एनडीए इस मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरने में सफल हो सकती है|

6. आधार को बायोमेट्रिक जाँच से बाहर रखने के मुद्दे पर: कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में वादा किया है कि अगर हम सत्ता में आते है तो आधार का उपयोग सिर्फ सब्सिडी के लिए किया जायेगा और इसको बायोमेट्रिक जाँच से बाहर किया जायेगा|

आधार को बायोमेट्रिक जाँच से बाहर रखना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगा| फिर किसी भी व्यक्ति के आधार का उपयोग कोई भी करके उस व्यक्ति को मिलने वाला फायदा दूसरा व्यक्ति ले सकता है या फिर आधार का दुरूपयोग भी हो सकता है|

7. राफेल का सौदा रद्द करने की बात: कांग्रेस ने राफेल के सौदे को रद्द करने का वादा तो किया लेकिन राफेल की जगह कोई और सौदा करने की बात नहीं की| ऐसे में बीजेपी मुद्दा बना सकती है कि कांग्रेस देश की सेना को कमजोर करना चाहती है|

8. नरेगा का मुद्दा: विपक्ष ने मोदी सरकार के उस बयान का खूब मजाक उड़ाया था जिसमें कहा गया था कि ‘पकौड़े बेचना भी एक रोजगार है|’ वहीं कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में वादा किया है कि हमारे सत्ता में आते ही मनरेगा पर विशेष ध्यान दिया जायेगा और इसका बजट बढाया जायेगा| ऐसे में एनडीए पकोड़े बेचने की जगह गद्दे खोदने और भरने की बात कहकर भी इसे मुद्दा बना सकती है|

9. नागरिकता संसोधन बिल: कांग्रेस ने वादा किया है कि सत्ता में आते ही नागरिकता संसोधन बिल को वापिस लिया जायेगा इसका सीधा मतलब है कि रोहिंग्याओं को भारत में बसाने के लिए कांग्रेस प्रतिबद्ध है| एनडीए के लिए यह भी बड़ा मुद्दा होगा कांग्रेस को घेरने में क्योंकि देश के ज्यादातर नागरिक रोहिंग्याओं को भारत में बसाने के पक्ष में नहीं है|

10. गरीबी मिटाने का वादा: कांग्रेस ने ‘न्याय’ योजना के तहत 2030 तक देश से गरीबी हटाने का एकबार फिर वादा किया है लेकिन यही वादा कांग्रेस पिछले 70 सालों करती आ रही है लेकिन अभी तक गरीबी हट नहीं पाई है|

एक तरह से देखा जाये तो कांग्रेस के इस घोषणापत्र (मेनिफेस्टो) ने गेंद एकबार फिर एनडीए के पाले में डाल दी है| हालाँकि सरकार बनने के बाद चुनावी घोषणा पत्र में किये गये वादों पर काम हो ऐसा कभी देखने को नहीं मिला है लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि जबतक चुनाव चलते है तब तक पार्टियों द्वारा जारी किये गये घोषणापत्र की महता रहती है और पार्टी की नीयत भी तय करते है घोषणापत्र|

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