क्या आपने इमरान प्रतापगढ़ी का नाम सुना है? यह नाम मुशायरे के लिए जाना जाता है। मुशायरे में यह नाम बहुत ही प्रसिद्ध है। इमरान प्रतापगढ़ी वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद सीट से कांग्रेस पार्टी के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं और हर प्रत्याशी की तरह उनका भी प्रचार जोरों पर चल रहा है। कहते हैं कि जो मुशयारा करने वाले या जो कवि होते हैं, उन्हें किसी पार्टी से कुछ लेना देना नहीं होता है। जैसा कि अंतरराष्ट्रीय कवि डॉ. कुमार विश्वास। डॉ. विश्वास जब आम आदमी पार्टी के सदस्य थे, तब भी वो सच का साथ देते थे, चाहे उन्हें ‘आप’ के खिलाफ ही क्यों न बोलना पड़े।

लेकिन इमरान प्रतापगढ़ी शुरू से ही कांग्रेस पार्टी की तरफ अपना रूख रखते हैं। खैर, यह तो सबका अधिकार है कि वो अपने जीवन में किसका समर्थन करता है। सभी लोग इन्हें इनके अच्छे कार्यों से ही जानते हैं। हर व्यक्ति के दो पहलू होते हैं। लेकिन प्रतापगढ़ी एक ऐसे व्यक्ति का गुणगान करते हैं, जिसका नाम उत्तर प्रदेश के माफियाओं की सूची में शीर्ष पर है। जी हां, इमरान, अतीक अहमद के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। मालूम हो कि अतीक अहमद पर हत्या, फिरौती, अपहरण, जैसे तमाम थरह की घटनाओं में मुकदमा दर्ज है और इलाहाबाद हाईकोर्ट में केस चल रहा है। कई हत्याओं का यह आरोपी इस समय प्रयागराज के नैनी जेल में बंद है। कुछ महीनों पहले अतीक अहमद जब देवरिया जेल में बंद था, तड उसने अपने गुर्गों से कहकर लखनऊ निवासी एक व्यापारी का अपहरण करा लिया और देवरिया जेल में बुलाकर खुब पिटाई की थी।

वर्ष 2016 की बात है। प्रयागराज में मुशायरे का आयोजन हुआ था, जिसमे अतीक अहमद भी सम्मिलित हुआ था। उस समय भी उस पर हत्या सहित कई अपराधों में केस चल रहा था। उस मुशायरे में शायर इमरान प्रतापगढ़ी को भी मुशायरा करने के लिए आमंत्रित किया गया था। इमरान ने उस व्यक्ति के सम्मान में खुब कसीदे गढ़े। मुशायरों के माध्यम से तारीफों की झड़ी लगा दी। उन्हें मालूम था कि यह व्यक्ति कई जघन्य अपराधों में अपराधी है, लेकिन इमरान साहब को उससे क्या? उन्हें तो बस अपना मज़हब दिखाई दे गया। उन्हें लगा होगा कि बेचारे अतीक को जबर्दस्ती आरोपी बनाया गया होगा, क्योंकि उसके जैसा सज्जन व्यक्ति इस दुनिया में कोई हो ही नहीं सकता।

सिर्फ अतीक अहमद ही नहीं, ये शायर साहब बीजेपी नेता कृष्णानंद राय की हत्या और दंगों के आरोपी पूर्व सांसद मुख्तार अंसारी के भी तारीफों के पुल बांधने से नहीं रुके। मुख्तार अंसारी की गिनती भी उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधियों में होती है। यूपी का यह कुख्यात अपराधी पिछले 10 सालों से जेल में बन्द है। इस पर मऊ जिले में दंगो के दौरान हिन्दुओ का नरसंहार करवाने का आरोप हैं। लेकिन शायर साहब ने उस अपराधी को शेर बताकर सम्मान दिया।

इतना ही नहीं, उसके बाद भी इमरान के साथ कई विवाद जुड़ते गये। एक बार खुद को मुस्लिम कौम का हमदर्द कहने वाले इमरान प्रतापगढ़ी का अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में मुशयारा था। इसमे आने के लिए इस हमदर्द ने वहां के छात्रों से 2.5 लाख रुपए मांगे और रहना खाना अलग से, जबकि पूरे मुशायरे का बजट ही कुल 2 लाख रुपए का था। जब उन्हें उनके मनमाफिक पैसे नहीं मिले, तो हमदर्द ने मना कर दिया और बिना उनके ही शानदार मुशयारा हुआ।

वर्ष 2018 में दशहरे का पावन पर्व चल रहा था। इस शायर के पिता मोहम्मद इलियास ने अपना नफरत दिखाते हुए ‘मां दुर्गा’ पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। जिसके बाद स्थानीय हिंदूओं में रोष उत्पन्न हुआ और अंत में थक हारकर इलियास ने माफी मांगी। स्थानीय लोग बताते हैं कि इलियास पहले सबसे मिल जुलकर रहता था, लेकिन जबसे उसका बेटा मुशायरे में चमकने लगा, उसके अंदर घमंड और एक धर्म के प्रति नफरत की भावना उत्पन्न हो गई।

आपको याद होगा कि 14 फरवरी को पाकिस्तान समर्थित एक आतंकवादी ने पुलवामा में हमला करके सीआरपीएफ के हमारे 40 जवानों के जानें ले लीं। इसके बाद पूरे देश में गम और गुस्से का माहौल बन गया और सभी देशवासी सरकार पर पाकिस्तान के खिलाफ बड़ी कारवाई करने की मांग करने लगे, जोकि जा़यज थी। 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में घुसकर कारवाई को अंजाम दिया। जिसके जवाब में पाकिस्तान ने 27 फरवरी को अपनी वायुसेना के विमान भारतीय सीमा में भेजे, तो भारत की तरफ से भी वायुसेना के लड़ाकों ने पाकिस्तान के विमानों को खदेड़ दिया।

लेकिन इस कारवाई में हमारे वायुसेना के एक पायलट विंग कमांडर अभिनंदन को पाकिस्तान ने अपने कब्जे में ले लिया। बालाकोट में एयर स्ट्राइक के बाद भारतीयों की खुशी एक बार फिर गम और गुस्से में तब्दील हो गई। सरकार ने भी पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दे दी थी कि पायलट को कुछ नहीं होना चाहिए। विंग कमांडर के पाकिस्तानी कब्जे में होने पर इमरान प्रतापगढ़ी को फिर एक बार सरकार पर निशाना साधने का मौका मिल गया। शायर साहब भारत सरकार से कहने लगे कि कुछ भी करिए, अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाइए या जंग करिए, लेकिन हमारे पायलट को वापस लाओ।

अगले दिन जब भारत सरकार ने अपने कर्तव्य के पालन करते हुए सही सलामत विंग कमांडर की वापसी करा दी, तो यही महाशय अपनी सरकार की प्रशंसा करने की बजाए, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को शांति का मसीहा बताने लगे।

इतना ही नहीं, आतंकी हमले के बाद जो गुस्सा देश में था, वही इनके अंदर भी था। 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना की कारवाई के बाद भारतीयों को खुशी हुई कि पकिस्तान को जवाब दिया गया, तब ये प्रतापगढ़ी साहब ‘Say No To War’ कैंपेन में शामिल हो गए।