किसी महापुरुष ने एक बार कहा था, “लाशों की गिनती हमेशा गिद्ध करते हैं क्योंकि गिद्धों का फायदा ही लाशों में है।” एयर फोर्स प्रमुख बीएस धनोआ ने 4 मार्च को ही साफ़ कह दिया था कि हमारा मिशन था टारगेट को हिट करना और हमने वो पूरी सटीकता से हिट किया। इसके बाद भी भारत में कांग्रेस और विपक्ष के नेता लगातार ढेर हुए आतंकियों की संख्या को पूछ रहे हैं।

वैसे ऐसे सभी लोगों को देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बहुत ही शानदार जवाब दिया है, आप भी सुनिए…

राजनाथ ने कहा की, जिनको आतंकियों की संख्या जाननी है। वो लोग पाकिस्तान चले जाये और उनकी संख्या को गिन लें। बात भी बिल्कुल वाजिब है। ऐसे सारे नेताओं को पाकिस्तान का वीजा भी बड़ी आसानी से मिल जायेगा। इन दिनों पाकिस्तान कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों से खुश भी है। ऐसे में इन लोगों को बड़ी आसानी से वीजा मिल जाएगा और गृहमंत्री की बात को मानकर कांग्रेस और विपक्ष के लोगो को पाकिस्तान जाकर गिनती कर ही लेनी चाहिए।

ऐसे गिद्धों पर केंद्रीय मंत्री और पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने भी बहुत बढ़िया तंज कसा है। उन्‍होंने ट्वीट कर कहा कि रात साढ़े 3 बजे मच्छर बहुत थे, तो मैंने HIT मारा। अब मच्छर कितने मारे, ये गिनने बैठूं, या आराम से सो जाऊं? पूर्व सेना प्रमुख के इस ट्वीट को बहुत पसंद किया गया है। सिर्फ 9 घंटे के अंदर 39 हजार से ज्यादा लोगों ने इसे लाइक किया है।

जनरल सिंह ने सवाल उठाने वाले नेताओं पर हमला बोलते हुए कहा कि अगली बार जब भारतीय वायुसेना कुछ ऐसा करे तो मुझे लगता है कि सवाल उठाने वालों को हवाई जहाज के नीचे बांध कर ले जाना चाहिए। जब बम गिरे तो सवाल उठाने वाले नीचे देख लें कि टारगेट पर बम गिरा या नहीं। उसके बाद उन्हें नीचे उतार दें, ताकि वो वहां लाशें गिन सकें।

वीके सिंह ने कहा कि जब वायुसेना ने कहा है कि 1000 किलो बम गिराए गए हैं, तो क्या वहां लोग मारे नहीं जाएंगे? अगर मारे गए, तो उनका अनुमान लगाया जा सकता है। यह दुर्भाग्य है कि कुछ लोग मरने वालों को भी गिनना चाहते हैं।

क्या मसला मारे गए आतंकियों की संख्या का है?
नहीं, बिल्कुल नहीं! बड़ी बात है पाक की वायु सीमा में 80 किलोमीटर अंदर घुस कर मारना और बिना किसी नुकसान के वापस आ जाना। यह क्षमता इजराइल और अमेरिका को छोड़कर दूसरे किसी भी देश की वायुसेना के पास नही थी, और अब यह क्षमता हमारे पास भी हैं। यह दुखद है कि सारी बहस संख्या पर हो रही है। संख्या कम भी हो तो सेना का शौर्य कम नहीं होता है। इस ऑपरेशन में संख्या पूछने वालों की उत्सुकता तो ऐसी है मानों उन्हें आतंकियों का श्राद्ध भोज देना हो।

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