पाकिस्तान सरकार और सेना के द्वारा महिलाओं पर किए जा रहे अमानवीय व इंसानियत को शर्मसार कर देने वाले अत्याचारों से क्षुब्ध एक महिला मानवाधिकार कार्यकर्ता ने जब इसके खिलाफ आवाज उठाई, तो पाकिस्तान ने उसे छिपकर जीने पर मजबूर कर दिया। हालांकि, अब उसका पता चल चुका है और वह अमेरिका में अपनी बहन के साथ रही है।

दरअसल, पाकिस्तानी सेना सिर्फ बलोचिस्तान और पीओके में ही लोगों को नहीं मारती है, बल्कि अपने देश के भीतर भी महिलाओं का यौन शोषण करती है। इससे परेशान होकर जब एक मानवाधिकार कार्यकर्ता गुलालाई इस्माइल ने इसके खिलाफ आवाज उठाई तो पाकिस्तानी सरकार ने उस पर देशद्रोह का मुदकमा दर्ज कर दिया। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के एक समूह ने पीएम इमरान खान को सामूहिक पत्र लिखकर इस्माइल के सुरक्षा की गुहार लगाई, लेकिन कोई सुरत्रा नहीं दी गई। नतीजा यह हुआ कि उसे अपने ही देश में तीन महीने तक छिपकर जीवन यापन करना पड़ा।

जान बचाकर अमेरिका पहुंची गुलालाई ने द न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में बताया कि वो पिछले महीने पाकिस्तान से बचकर निकलने में कामयाब रही और अभी अपनी बहन के साथ ब्रुकलिन में रह रही है। उसने बताया कि वो हवाई अड्डे से बाहर कहीं उड़ान नहीं भरी और साथ ही यह भी कहा कि पाकिस्तान से निकलने के बारे में वो ज्यादा कुछ नहीं कहेगी, क्योंकि ऐसा करने से पाकिस्तान में कई लोगों का जीवन खतरे में पड़ सकता है।

हालांकि, इस्माइल को अभी भी अपने माता-पिता के साथ साथ उन लोगों की भी चिंता सता रही है, जिन्होंने उसे पाकिस्तान से भागने में मदद की। क्योंकि पाक सरकार ने उसे देश से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगा रखा था। उसने बताया कि अभी वो सुरक्षित है और प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों से मिलना शुरू कर दिया है। गुलालाई ने अमेरिका में राजनीतिक शरण के लिए अर्जी दी है। अमेरिका सांसद चार्ल्स स्कूमर ने कहा कि वो गुलालाई के शरण के लिए पूरी मदद करेंगे, क्योंकि अगर वो वापस पाकिस्तान जाती है तो उसकी जिंदगी खतरे में है।

आपको बता दें कि पाकिस्तान में भी आम जनता आए दिन सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करती रहती है, क्योंकि सेना उन पर अत्याचार करती है। गुलालाई ने भी सेना द्वारा किए जा रहे यौन शोषण, गुमशुदगी, आदि के खिलाफ आवाज उठाई और कहा कि उसके साथ साथ देश के अन्य लोग भी सेना के इस घटिया व्यवहार से परेशान हैं। अपने ऊपर लगे देशद्रोह के आरोपों को इस्माइल ने गलत बताते हुए कहा कि ऐसा सिर्फ इसलिए किया गया है, क्योंकि उसने सेना द्वारा किए जा रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन की बात की।

दरअसल, इस्माइल पाकिस्तान की पश्तून तहफ्फुज आंदोलन (PTM) पार्टी की नेता हैं। इमरान खान के सत्ता संभालने के बाद से इस्माइल की मुश्किलें शुरू हुईं और उन पर देशद्रोह कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। उसने अगस्त महीने में फरिश्ता मोहम्मद की हत्या के विरोध में अधिकारियों की भूमिका उजागर करने के प्रदर्शनों में भी हिस्सा लिया था। फरिश्ता की लाश इस्लामाबाद के वुडलैंड में मिली थी। बीते 27 मई को इस्माइल को पाक सरकार ने राज्य विरोधी गतिविधियों में शामिल होने पर ब्लैकलिस्ट कर दिया था।

मालूम हो कि पाकिस्तान 5 अगस्त के बाद से जम्मू कश्मीर पर भारत के फैसले के खिलाफ विश्व भर में अपने लिए समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है और कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन की दुहाई दे रहा है। ऐसे समय में उसी देश की एक महिला द्वारा पाकिस्तान सरकार की पोल खोलना पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा झटका है। क्योंकि बलोचिस्तान और पीओके के लोगों में पाक सरकार और सेना के खिलाफ पहले से ही भारी गुस्सा है।