सबरीमाला मन्दिर में महिलाओ का प्रवेश आस्था और लैंगिक समानता के अधिकार से ज्यादा वहाँ की धार्मिक परम्परा को नीचा दिखाने का हैं, क्योकि जिन्हें सच में भगवान अयप्पा में आस्था हैं वह महिला तो मन्दिर में जाएगी ही नही जिसका उदाहरण वहाँ महीनों से निरंन्तर प्रदर्शन करने वाली लाखो महिलाओ को देखकर समझा जा सकता हैं। बहरहाल खुद को नास्तिक कहने वाली एक महिला पत्रकार ने सोशल मीडिया पर भगवान अयप्पा के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए सबरीमाला जाने की घोषणा की, जिसे सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने के पहले ही प्रदर्शनकारियों ने घुसने नहीं दिया और वापस भेज दिया।

ऑनलाइन पोर्टल स्वराजमग की एक रिपोर्ट के मुताबिक लिबी CS नामक महिला पत्रकार जैसे ही बस स्टैंड के अंदर घुसी उसको श्रद्धालुओं का गुस्सा झेलना पड़ा।उस समय लिबी श्रद्धालु की तरह माथे पर विभूति और वस्त्र धारण किये हुए। उसने सोशल मीडिया में लिखा ” मित्र हम 4 लोग सबरीमाला में दर्शन को आये है। मैं नास्तिक हूँ, साथ मे 2 श्रद्धालु है। मैं इसलिए नहीं जा रही हूँ कि मेरी कोई मनोकामनाएं है”। ऐसी उम्मीद की जा रही हैं की प्रदर्शनकारियों ने महिला पत्रकार की फेसबुक पोस्ट की वजह से पहचान लिया और उन्हें बस स्टैंड पर ही रोक दिया गया।

पत्रकार लिबी Newsgil नामक वेबसाइट में संपादक हैं। इस पत्रकार ने इससे पहले अपनी वेबसाइट पर एक स्टोरी पब्लिश की जिसमे भगवान अयप्पा के लिए बहुत ही अशोभनीय टिप्पणी की थी। इसने लिखा था कि अगर महिलाओं के सबरीमाला मंदिर मे प्रवेश से भगवान अयप्पा की कामवासना जाग्रत हो जाती है तो उनको दवाई दे कर शांत किया जा सकता है। केरल में कई संगठनो ने इस महिला पत्रकार के खिलाफ बेहूदा पोस्ट को लेकर FIR करने की मांग की थी।

नास्तिकता के नाम पर एक धर्म को टारगेट करने का ये सिलसिला देश मे वर्षो से चला आ रहा है। आपको छूट है अपना पसंदीदा धर्म अपनाने की। आप ईश्वर के साकार रूप को माने, निराकार रूप को या फिर ईश्वर को ही ना माने। पर आपको ईश्वर का अपमान करने का अधिकार किसी ने नहीं दिया। अभिव्यक्ति की आज़ादी भी वहां तक है जहां तक किसी की भावनाएं आहत नहीं होती। महिला के अधिकारों की आड़ लेकर अगर इतनी बेहूदा टिप्पणी की जाएगी तो उस पर कड़ी कारवाई की जानी चाहिए और एक दिन यही आस्तिक महिलाएं जो इनके साथ गयी है वो इनका दोहरा चरित्र भी पहचान जाएंगी की ये महिला अधिकारों को बात तो करती है पर सिर्फ एक धर्म की परम्पराओ के खिलाफ, दरगाहों मस्जिदों में महिला के प्रवेश पर मौन हो जाती है। यहाँ तक की उनके ही राज्य में जालन्धर का बिशप आकर ननों के साथ बलात्कार करता हैं, बेचारी नने इंसाफ मांगने के लिए सड़क पर उतर आती हैं, तो उन्हें वैश्या कहा जाता हैं, लेकिन इनकी कलम उस बलात्कारी बिशप पादरी के खिलाफ एक शब्द नहीं लिख पाती, ना जाने इतना डबल स्टैंडर्ड ये कहाँ से ला पाती हैं।