‘आम आदमी पार्टी’ के संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक बार फिर एक युवक ने थप्पड़ मारा है। रोड शो के दौरान जब केजरीवाल दिल्ली के गोमतीनगर में जनता का अभिवादन कर रहे थे, तभी अचानक एक शख्स आगे से उनके वाहन पर चढ़कर उन्हें थप्पड़ मार गया। इसके बाद ‘आप’ के कार्यकर्ताओं ने उस युवक की जमकर धुनाई की, जिससे उसे गंभीर चोटें आई। बीच बचाव करते हुए पुलिस ने अभियुक्त को तत्काल हिरासत में लेकर पूछताछ करना शुरू कर दिया।

अगर हम केजरीवाल पर हुए पिछले हमलों का इतिहास देखें, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि मुख्यमंत्री चर्चा में बने रहने के लिए खुद पर हमले करवाते हैं। इस हमले के बाद से भी सोशल मीडिया में यह कयास लगने शुरू हो गई थी कि हमलावर उन्हीं की पार्टी से हो सकता है और आखिर में यह आशंका भी सच साबित हुई। गिरफ्तार हुए सुरेश नाम के युवक ने बताया कि वह ‘आप’ समर्थक है और पार्टी की रैली और सभाओं का आयोजन करता है। पूछताछ में उसने बताया कि उसे रोड शो की जानकारी व्हाट्सएप के माध्यम से मिली थी। वह मुख्यमंत्री एवं अन्य ‘आप’ नेताओं के कार्यक्रमों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेता है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से वह पार्टी के शीर्ष नेताओं के रवैए से क्षुब्ध था, जिससे परेशान होकर उसने यह कदम उठाया।

पूछताछ में सुरेश ने आगे बताया कि पार्टी द्वारा सेना पर जताए जा रहे कथित अविश्वास से भी वह नाराज हो गया था। इसलिए जैसे ही सीएम अरविंद केजरीवाल अपनी गाड़ी से उतरकर खुले वाहन में सवार हुए। आरोपी ने वाहन पर चढ़कर थप्पड़ रसीद कर दिया। आरोपी का दावा है कि वह ‘आप’ विधायक शिवचरण गोयल को भी थप्पड़ मारना चाहता था। उधर दिल्ली पुलिस का कहना है कि सीएम की सुरक्षा की देखभाल की जांच अब डीसीपी स्तर के अधिकारी करेंगे। आपको बता दें कि पार्टी की तरफ से अभी तक आरोपी के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

अब इसे इत्तेफाक कहें या कुछ और, लेकिन पता नहीं आखिर क्यों जब भी कोई व्यक्ति अरविंद केजरीवाल पर हमला करता है, तो वह या तो ‘आप’ का सदस्य होता है ता समर्थक। इससे पहले भी जब जब केजरीवाल पर किसी भी तरह का हमला हुआ है, तो जांच में हमेशा आरोपी ‘आप’ का सदस्य ही पाया गया है।

गौरतलब है कि 21 नवंबर, 2018 को केजरीवाल पर सचिवालय में एक व्यक्ति ने मिर्च पाउडर से हमला कर दिया था। अनिल शर्मा नाम के इस व्यक्ति ने भी अपने वकील के माध्यम से कोर्ट में बताया कि 20 नवंबर, 2018 को ‘आप’ के लोगों ने उसे बुलाकर केजरीवाल के साथ दुर्व्यवहार करने के लिए कहा था, ताकि दिल्ली सीएम को सस्ती लोकप्रियता हासिल हो। हालांकि, मजिस्ट्रेट ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर तत्काल जमानत देने से इंकार कर दिया था।

इतना ही नहीं, 2014 में भी लोकसभा चुनाव से ठीक पहले लाली नाम के एक ऑटो चालक ने केजरीवाल को थप्पड़ जड़ा था। इस मामले में भी दिल्ली पुलिस ने केजरीवाल से शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने किसी भी तरह का कोई भी रिपोर्ट दर्ज करवाने से साफ इंकार कर दिया और शाम तक आरोपी के घर फूलों के गुलदस्ते के साथ पहुंच गए और उसे पार्टी में शामिल कर लिया।

अगर हम केजरीवाल पर हुए इन हमलों को देखकर विचार करें तो यह पाएंगे कि हर चुनाव से ठीक पहले या बीच में उन पर हमले हुए हैं और हमेशा ही केजरीवाल या उनकी पार्टी के किसी भी बंदे ने आरोपियों के खिलाफ कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है। सबसे बड़ी बात यह कि उन सभी आरोपियों को कुछ ही दिनों में माफ कर दिया जाता है और मुख्यमंत्री खुद उनका सम्मान करने पहुंच जाते हैं।

ध्यान देने वाली बात है कि जब जब केजरीवाल वाला पर हमले हुए हैं, उनकी पार्टी का चंदा बढ़ गया है। अगर देखा जाए तो अब तक केजरीवाल पर करीब 8-10 थप्पड़ या इंक फेंकने की घटनाएँ हो चुकीं हैं। संख्‍या घट बढ़ सकती है पर इससे जुड़े आँकड़े चौकाने वाले हैं। इस तरह की घटनाएँ केजरीवाल को फिर से चर्चा में ला देतीं हैं, जिससे पार्टी को मिलने वाले चंदों में काफी बढ़ोतरी देखी गई है।

बहरहाल, लोकतंत्र में सभी नागरिकों को नेताओं एवं जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नाराजगी जाहिर करने का पूरा अधिकार है, लेकिन नेताओं द्वारा या आम जन द्वारा किसी भी तरह की हिंसा की कोई जगह नहीं है। अगर किसी व्यक्ति की किसी जनप्रतिनिधि से कोई शिकवा शिकायत है, तो वह अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से कह सकते हैं।