अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाने वाले केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राम मंदिर पर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जो राम मंदिर का विरोध कर रहे हैं, उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए। प्रभु श्रीराम इस देश की आत्मा हैं।

आगे उन्होंने कहा कि अगर सरदार वल्लभ भाई पटेल देश के प्रथम प्रधानमंत्री होते तो राम मंदिर निर्माण बहुत पहले हो चुका होता। लेकिन दुर्भाग्य इस देश का कि नेहरु ने राजनीतिक लाभ के लिए इसे लटकाए रखा। उन्होंने कहा कि जो लोग अल्पसंख्यकों के खिलाफ असहिष्णुता का हवाला देकर राम मंदिर का विरोध कर रहे हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर इस देश में नहीं रहना चाहिए। ऐसे लोग हिंदूओं के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं।

केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के लिए ‘‘छद्म धर्मनिरपेक्षों’’ पर निशाना साधते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जो देश में असहिष्णुता के बारे में चिल्ला रहे हैं, वे असल में ‘‘असहिष्णुता के गिरोह’’ हैं, जो देश को गंदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि हम सहिष्णु हैं तो अन्य समुदाय इसका फायदा ले सकते हैं। भारत जैसे हिंदू बाहुल्य देश में हिंदूओं को अपने देवी-देवताओं की प्रार्थना करने से कैसे रोका जा सकता है? दूसरे धर्मों को हमें, हमारे देवताओं की प्रार्थना करने से रोकने का कैसा अधिकार है? किसी को भी हिंदुओं के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए।’’

राम का का विरोध कर रहे लोगों पर उन्होंने कहा, “जो छद्म धर्मनिरपेक्ष, जेएनयू में भारत विरोधी नारे लगाने वाले ओर उनका समर्थन करने वाले इसका विरोध कर रहे हैं। जो असहिष्णुता की बात कर रहे हैं, उन्हें अपनी किस्मत को धन्यवाद देना चाहिए कि भारत एक हिंदू बाहुल्य देश है। उन्हें पाकिस्तान जाकर देखना चाहिए कि वहां किस तरह का लोकतंत्र है।”

देश में बढ़ती हुई जनसंख्या पर सिंह ने कहा, “आखिर क्या वजह है कि जिस क्षेत्र में हिंदू बहुसंख्यक हैं, वहां शांति रहती है और जहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं, वहां वे सुख चैन से नहीं रह पाते हैं?”

बता दें का गिरिराज सिंह इससे पहले भी जनसंख्या नियंत्रण कानून और राम मंदिर निर्माण पर अपनी आवाज बुलंद कर चुके हैं। केंद्रीय मंत्री जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने के लिए गंभीर हैं और इस मुद्दे पर लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चला रहे हैं।

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