सरकार की तरफ से उन खबरों का खंडन किया गया है, जिनमे कहा जा रहा था सरकार नीति आयोग की सिफारिश पर संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में बैठने के लिए सामान्य वर्ग की आयु घटाने पर विचार कर रही है। पीएमओ में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इन खबरों का खंडन करते हुए कहा कि सरकार सिविल सेवा की परीक्षा के लिए सामान्य वर्ग की उम्र घटाने पर विचार नहीं कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी खबरों पर विराम लगना चाहिए।

नीति आयोग ने उम्र कम करने के लिए दिया था सुझाव

बता दें कि पिछले दिनों नीति आयोग ने ‘नए के भारत के लिए रणनीति @75’ शीर्षक से जारी एक दस्तावेज में सिविल सेवा परीक्षा के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों की उम्र सीमा घटाने की बात कही गई थी। साथ ही न्यू इंडिया के लिए सिविल सेवा के लिए एक ही परीक्षा लेने की बात कही गई थी। इस समय केंद्र और राज्य स्तर पर 60 से ज्यादा अलग-अलग तरह की सिविल सेवाएं हैं। इन सभी खबरों को जितेंद्र सिंह ने सिरे से खारिज कर दिया।

मौजूदा समय में सिविल सेवाओं में चयनित होने वाले अभ्यर्थियों की औसत उम्र साढ़े 25 साल है और भारत की एक-तिहाई से ज्यादा आबादी की उम्र इस समय 35 साल से कम है। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि नौकरशाही में उच्च स्तर पर विशेषज्ञों की लेटरल एंट्री को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए। फिलहाल सिविल सेवा परीक्षा के लिए सामान्य वर्ग की न्यूनतम 21 वर्ष और अधिकतम आयु 32 वर्ष है। वहीं, एससी एसटी के लिए अधिकतम आयु 37 वर्ष है।

नीति आयोग की सुझाव का हवाला देते हुए कुछ न्यूज पोर्टल्स ने सरकार की आलोचना करनी शुरू कर दी थी। यह सुझाव खबरों में आने के बाद सामान्य वर्ग ने सरकार का भारी विरोध शुरू कर दिया था। लेकिन सरकार के इस स्पष्टीकरण से सवर्णों में खुशी का माहौल है।