पिछले कई दिनों से एक सेट पैटर्न बन गया है की अल्पसंख्यक युवकों द्वारा हिंदुओ पर ‘जय श्री राम’ बुलवाने को लेकर झूठे आरोप गढ़े जा रहे। बीते दिनों कानपुर में मदरसा छात्र द्वारा जय श्रीराम न बोलने पर पिटाई का आरोप लगाया। लेकिन पुलिस की जांच में मामला ओवरटेक का सामने आया। अब कुछ ऐसा ही मामला उन्नाव जिले में सामने आया है, जहां जीआईसी मैदान पर क्रिकेट खेलने को लेकर विवाद हुआ। लेकिन दारुल उलूम फैज-ए-आम मदरसे के बच्चों ने जय श्रीराम न बोलने पर पिटाई करने का आरोप लगाया है।

क्या है पूरा मामला

दरअसल पूरा मामला यह है कि उन्नाव शहर के सिविल लाइन स्थित राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में अलग-अलग मोहल्ले के रहने वाले छात्र क्रिकेट मैच खेल रहे थे, तभी मोहल्ला एबी नगर स्थित मदरसा दारुल उलूम फैज-ए-आम के 15-20 बच्चे भी मैच खेलने पहुंच गए। इन छात्रों से पहले से खेल रहे बच्चो में किसी बात को लेकर विवाद शुरू कर दिया। मामला इतना बढ़ गया कि दोनों तरफ से स्टंप व बल्लों से मारपीट शुरू हो गई।

इस मारपीट में दोनो पक्षो के बच्चो को चोट आई, जिसमें मदरसे के दो बच्चो को भी चोट आयी। जबकि कई बच्चो के बीचबचाव में कपड़े भी फट गए।

मौलाना ने दिया घटना को साम्प्रदायिक रंग

जब घायल बच्चे मदरसे पहुंचे तो उन्होंने इस घटना की जानकारी मदरसा संचालक निसार अहमद मिस्बाही को दी जो उन्नाव की जामा मस्जिद के मौलाना भी है। उन्होंने मारपीट की इस पूरी घटना को सांप्रदायिक रंग देने के लिए पहले से चल रहे ट्रेंड ‘जय श्री राम नही बोला इसलिए पिटाई हुई’ का अनुसरण करते हुए पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस की प्रथम दृष्टया जांच में मामला स्टम्प गाड़ने को लेकर हुए विवाद का सामने आया है। सीओ सिटी उमेश चंद्र त्यागी ने बताया कि विवाद क्रिकेट खेलने को लेकर हुआ था।

उन्नाव पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताई हकीकत

थाना कोतवाली क्षेत्रांतर्गत जीआईसी मैदान में क्रिकेट खेलने के दौरान बच्चो में हुई मार पीट के सम्बन्ध में पुलिस अधीक्षक और क्षेत्राधिकारी द्वारा दी गयी बाइट।

Common Sense का इस्तेमाल नही करते पत्रकार

लेकिन यहाँ तथ्यो पर कौन ध्यान देता है, बड़े-बड़े संस्थानों से पढ़े पत्रकार भी बस प्रोपोगंडा को हवा देते नजर आते है, यहाँ तक कि मामूली समझ तक का ये लोग इस्तेमाल नही करते। आप इनकी घटना की रिपोर्टिंग पढ़िये ‘चार लोगों में जय श्री राम का नारा ना लगाने पर पीटा’ फिर उसी खबर में यह भी लिखा है कि मदरसे से 15 से 20 बच्चे क्रिकेट खेलने गए थे। अब आप स्वयं सोचिये वह चार लोग सुपर मैन थे जो उन 15-20 बच्चो को उछल उछल कर पीट दिया। इनकी कहानी के सामने तो साउथ की फिल्में भी फेल है।

मौलाना निसार की शहर जलाने की धमकी

बहरहाल, मदरसे के संचालक और जामा मस्जिद के इमाम निसार अहमद मिस्बाही ने पुलिस पर दबाव बनाने के लिए इशारे इशारे में पूरा शहर जलाने की धमकी दी है, उन्होंने कहा कि अगर लड़के गिरफ्तार नही हुए तो मस्जिद से जुमे के दिन जब भीड़ निकलेगी तो उसे प्रशासन कंट्रोल नही कर पायेगा।

अब तक सारे मामले साबित हुए झूठे

आपको बता दे कि अब तक ‘जय श्री राम’ ना बोलने पर पिटाई के जितने भी मामले सामने आये है सारे के सारे झूठे निकले है। यहां तक कि कुछ मामलों में मुसलमान ही दूसरे मुसलमान को जबरन जय श्रीराम बुलवाते फर्जी वीडियो बनाते पकड़े गए है।

जय श्री राम बुलवाने के झूठे आरोपो का बन गया है सेट पैटर्न

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के शुरू होने के बाद से एक सेट पैटर्न बन गया है। अल्पसंख्यक युवकों द्वारा हिंदुओ पर ‘ जय श्री राम’ बुलवाने को लेकर झूठे आरोप गढ़े जा रहे। मीडिया का एक बड़ा तबका पुलिस जांच से पहले ही इन खबरों को वायरल कर देता है, जिससे दोनो समाज के बीच वैमनस्य स्थापित होता जा रहा है। पुलिस को ऐसे झूठे आरोप लगाने वालों पर व ऐसी खबरें चलाने वालों पर कड़ी कारवाही करनी चाहिए ताकि ऐसे मामलों की आगे पुनरावृत्ति न हो।