जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय की एक उच्च स्तरीय जांच समिति ने छात्र नेता उमर खालिद की बर्खास्तगी और कन्हैया कुमार पर लगाए गए 10 हज़ार रु के अर्थदंड को बरकरार रखा है।

मामला 9 फरवरी 2016 का है, जब यूनिवर्सिटी परिसर में भारत की संसद पर हमला करने वाले दुर्दान्त आतंकी अफजल गुरु की बरसी पर जेएनयू में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया और उसमें देश विरोधी नारेबाजी हुई। मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ा और छात्र उमर खालिद, कन्हैया कुमार और अनिर्बान भट्टाचार्य की गिरफ्तारी हो गयी। बाद में तीनों को हाई कोर्ट से जमानत तो मिल गयी, पर मामला समाप्त नहीं हुआ था। जेएनयू प्रशासन ने मामले की जांच को एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी जिसका फैसला कल आया है।

विश्वविद्यालय परिसर में होने वाले क्रिया कलाप हमेशा से विवादों के घेरे में रहे हैं। चाहे वो बीफ फेस्टिवल रहा हो, किस ऑफ लव हो या अफ़ज़ल की बरसी पर आयोजित किया जाने वाला कार्यक्रम हो।

कश्मीर में अलगाववादी और आतंकवादी द्वारा दिया गया नारा, “अफ़ज़ल हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा है ” की प्रतिध्वनि सैकड़ो किलोमीटर दूर दिल्ली के जेएनयू में सुनाई देती है। आतंकी और नक्सली गतिविधियों से जुड़े लिंक कहीं न कहीं जेएनयू के छात्रों और प्रोफ़ेसर से जुड़े पाए जाते हैं। उमर खालिद के पिता सईद कासिम इल्यास SIMI से जुड़े हुए थे, वही सिमी जिंसको आतंकी गतिविधियों के चलते 2001 में प्रतिबंधित कर दिया गया। The Wire के सम्पादक सिद्धार्थ वर्धराजन की पत्नी और जेएनयू प्रोफेसर नंदिनी सुंदर के ऊपर नक्सली की हत्या का मामला चल रहा है। प्रोफेसर साईबाबा को महाराष्ट्र पुलिस ने गढ़चिरौली में हुई नक्सली गतिविधियों के लिए गिरफ्तार किया था और जिला अदालत ने प्रोफेसर को उम्र कैद की सजा सुनाई।

प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश रचने का मुख्य आरोपी रोना विल्सन भी JNU से जुड़ा हुआ था, यह वहाँ असिटेंट प्रोफेसर था, अब आप समझ सकते हैं कि यह किस प्रकार का संस्थान हैं जहाँ नक्सली तक प्रोफेसर हैं।

कॉमरेड कन्हैया कुमार हमेशा से भारतीय सेना को बलात्कारी बोलता रहा है जिसके चलते कई मौकों पर राष्ट्रवादियों द्वारा उसकी पिटाई भी की जा चुकी है।

JNU में यह वर्ग अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर सिर्फ आतंकियों, नक्सलियों, अलगाववादियों, व्यभिचारियों का समर्थन करता रहता है।

ये विडम्बना ही है की दिल्ली में स्थित जेएनयू और IIT के कैंपस एक दूसरे से चन्द मिनटों की दूरी पर है और जहां जेएनयू में 35 वर्षीय छात्र आम आदमी की गाढ़ी कमाई से मिल रही सब्सिडी पर पीएचडी कर रहा होता है , देश विरोधी नारेबाजी और गतिविधियों में शामिल पाया जाता है वही 22 वर्षीय IITian न सिर्फ देश विदेश में भारत का नाम रोशन करता है बल्कि एक करदाता बन कर देश के विकास में हिस्सेदारी भी देता है।