त्रिपुरा के धर्मनगर में मुख्यमंत्री विप्लब देब ने 16 अक्टूबर को त्रिपुरा के आखिरी महाराज बीर बिक्रम किशोर मनिक्या बहादुर की मूर्ति का अनावरण करते ही यह सुनिश्चित कर दिया की त्रिपुरा अपने मुख्यमंत्री विप्लव देब की अगुवाई में अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जड़ों की तरफ लौटने लगा है। यह देश लेनिन और मार्क्स का नही हैं और ना ही उनका खूनी कम्युनिज्म मॉडल इस देश का मॉडल कभी बन सकता हैं। उनका मॉडल तो उनके देश मे ही नही चला और खण्ड-खण्ड करके टूट गया तो फिर हमारे देश में यह कैसे चल सकता हैं? भारत को किसी आयातित नायक की जरूरत नही हैं, हमारे यहाँ एक से एक महापुरुष हैं महानायक हैं जो यहाँ की मिट्टी से हैं यहाँ की संस्कृति से हैं। हमे अगर कुछ सीखना हैं तो उनसे सीखना हैं उन्ही के विचारों पर चलकर ही हम भारत जैसे विशाल और विविध परम्पराओ वालो देश को बचा सकेंगे।

बहरहाल, लेनिन की जगह महाराज बीर बिक्रम किशोर मनिक्या बहादुर की मूर्ति स्थापित करने की सूचना ट्विटर पर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री विप्लब देब ने ट्वीट लिख कर देते हुए कहा, ‘हमारे प्यारे राज्य के 37 लाख नागरिक आधुनिक त्रिपुरा के वास्तुकार महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य के हमेशा ऋणी रहेंगे।’

इस वर्ष जुलाई में भारत सरकार ने अगरतला के हवाई अड्डे का नाम भी महाराज बीर बिक्रम किशोर मनिक्या बहादुर के नाम पर रखा हैं। रोचक बात है कि मुख्यमंत्री के इस कदम को राज्य के कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष प्रद्योत किशोर मनिक्या ने भी सराहा है जो महाराज के पोते हैं। किशोर माणिक्य ने कहा, “मेरे दादाजी के नाम पर हवाई अड्डे का नामकरण भाजपा और कांग्रेस दोनों के घोषणापत्र में सम्मिलित था। मुख्यमंत्री बिपलब देव ने मुझे व्यक्तिगत रूप से आश्वासन दिया था और मुझे प्रसन्नता है कि उन्होंने अपना वादा पूरा किया।”

महाराज बीर विक्रम किशोर का इतिहास

बीर बिक्रम किशोर (बाएं) और रविंद्र नाथ टैगोर के साथ उनके दादा राधा किशोर माणिक्य

राजा बीर विक्रम किशोर देव बर्मन माणिक्य बहादुर आजादी से पहले त्रिपुरा के राजा हुआ करते थे। माणिक्य राज परिवार से आने वाले बीर विक्रम की पैदाइश 19 अगस्त, 1908 की है। उनका राजवंश सन 1280 से त्रिपुरा में राज कर रही है। उस समय रत्ना माणिक्य ने त्रिपुरा में इस राजवंश की स्थापना की थी। बीर विक्रम इस राजपरिवार की 185वीं पीढ़ी के नुमाइंदे थे। वो 1923 से मई 1947 तक त्रिपुरा के राजा रहे। बीर विक्रम को आधुनिक त्रिपुरा की नींव रखने वाला शख्स कहा जा सकता है। उन्होंने त्रिपुरा में कई सारे शिक्षण संस्थान खोले। महाराजा बीर विक्रम कॉलेज, उमाकांत अकादमी, बोधजंग बॉयज हाई स्कूल, महारानी तुलसीबती गर्ल्स हाई स्कूल आज भी सूबे के सबसे बेहतरीन शिक्षण संस्थानों में से एक है। बीर विक्रम की रखी नींव की वजह से त्रिपुरा देश के सबसे ज्यादा शिक्षित राज्यों में एक है। 2011 की जन गणना में त्रिपुरा की साक्षरता दर 94 फीसदी दर्ज की गई है। बीर विक्रम और उनके दादा राधा किशोर माणिक्य आज भी त्रिपुरा के आदिवासियों में बहुत लोकप्रिय हैं।आदिवासी आज भी अपने राजा को लेकर बहुत भावुक हैं।