भारतीय जनता पार्टी के स्टार प्रचारक व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ‘योगी आदित्यनाथ’ विधानसभा चुनाव वाले राज्यों राजस्थान, छत्तीसगढ एवं मध्य प्रदेश में प्रचार के लिए ऐसे नेता बनकर उभरे हैं जिनकी सबसे ज्यादा मांग है। इन राज्यों में पार्टी का भविष्य दांव पर लगा हुआ है, क्योंकि वर्तमान समय में इन राज्यों में इसी पार्टी कि सरकार है। छत्तीसगढ़ में चार बार से, जबकि मध्यप्रदेश में 3 बार से लगातार बीजेपी की सरकार है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने सोमवार को पीटीआई-भाषा को बताया कि योगी ने इन तीन राज्यों में पचास से ज्यादा चुनावी सभाओं को संबोधित किया है। इन स्थानों पर स्थानीय प्रत्याशियों के प्रचार के लिये योगी की मांग सबसे ज्यादा थी। उन्होंने कहा, ”हिन्दुत्व का चेहरा बन चुके आदित्यनाथ ने चुनाव वाले तीन राज्यों में 53 जनसभाएं की हैं। इनमें छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा 21 सभायें शामिल हैं। जबकि यहां पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने नौ जनसभाओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ चार सभाओं को संबोधित किया है।” इसी तरह मध्यप्रदेश में योगी ने 15 जनसभाएं कीं, जबकि अमित शाह ने 25 और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 जनसभाओं को संबोधित किया।

गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ भारतीय जनता पार्टी के फायरब्रांड एवं हिंदूत्ववादी नेता हैं और विपक्षियों पर अपने तीखे हमलों के लिए जाने जाते हैं। रैलियों में जुट रही भीड़ को देखकर इस बात का अंदाजा लगाया सकता है कि ना सिर्फ स्थानीय प्रत्याशियों की मांग है, बल्कि जनता के बीच भी क्रेज़ है और उनकी हिंदुत्ववादी छवि जनता को पसंद आ रही है।

दूसरे राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी किया प्रचार

लगातार पांच बार सांसद रहे योगी आदित्यनाथ 2017 में जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो पार्टी ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। हालांकि, सांसद रहते हुए भी पार्टी में उनकी बड़ी भूमिका थी और केंद्रीय समिति भी पार्टी हितों और चुनावी रणनीतियों को लेकर उनसे राय मशविरा करती थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद जिन राज्यों में चुनाव हुए, वो थे गुजरात, हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा और कर्नाटक। योगी ने गुजरात में 35 रैलियाँ व एक गौरव यात्रा, हिमाचल प्रदेश में 15 रैलियां व त्रिपुरा में 2 दिन में 7 रैलियां व 4 रोड शो किया। त्रिपुरा में नाथ सम्प्रदाय के 12-13 लाख लोग नाथ सम्प्रदाय के अनुयायी हैं। इनमे से अधिकतर वे हैं, जो बांग्लादेश से आकर यहां बस गए थे। नाथ सम्प्रदाय के लोग योगी को अपना गुरु मानते हैं। यही कारण है कि पार्टी ने उन्हें त्रिपुरा में प्रचार करने के लिए भेजा, जिसका फायदा भी हुआ और 25 साल का वामपंथी किला भी ढह गया। योगी ने त्रिपुरा के 22 विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार किया, जिनमे से 17 पर पार्टी को कामयाबी मिली। 2013 में हुए चुनाव में बीजेपी 50 सीटों पर लड़ी और इनमे से 49 सीटों पर जमानत भी जब्त हो गई। कर्नाटक में भी आदित्यनाथ ने 24 रैलियां कर 50 विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया था। जिन सीटों के लिए योगी ने रैलियां कीं, उनमे से कई सीटों पर बीजेपी को 2013 के मुकाबले सफलता मिली और और बढत भी। कर्नाटक में आदित्यनाथ की 35 रैलियां प्रस्तावित थीं, लेकिन प्रदेश में आए तूफान की वजह से उन्हें अपना दौरा बीच में ही छोड़ना पड़ा।
प्रदेश प्रवक्ता शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा, “प्रदेश में निरंतर विकास के कार्य हो रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि दूसरे राज्यों में हमारे मुख्यमंत्री की मांग यह दर्शाती है कि राष्ट्रीय स्तर पर उनकी दमदार छवि बन रही है।

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