मोदी सरकार ने धर्मान्तरण के ख़िलाफ़ सख़्त क़दम उठाते हुए सभी ग़ैर-सरकारी संगठनों के लिए ‘विदेशी योगदान विनियम अधिनयम (FCRA)’ के नियमों को कड़ा कर दिया है। केंद्र सरकार ने कहा कि एफसीआरए रेजिस्ट्रेशन की चाह रखने वाले ग़ैर-सरकारी संगठनों के सभी कार्यकर्ताओं व सदस्यों को एक एफिडेविट दायर कर इस बात की पुष्टि करनी होगी कि वे किसी भी प्रकार के धर्मान्तरण के कार्यों में लिप्त नहीं हैं और उनके ख़िलाफ़ सांप्रदायिक तनाव सम्बन्धी कोई मामला दर्ज नहीं है।

इससे धर्मान्तरण में लिप्त एनजीओ व उनके कार्यकर्ताओं को तगड़ा झटका लगा है। साथ ही सांप्रदायिक तनाव भड़काने वाले एनजीओ व उनके सदस्यों को भी एफआरसीए रजिस्ट्रेशन नहीं प्राप्त होगा। इससे उन्हें विदेश से फंड या चंदा नहीं मिल सकेगा। 2011 के नियमों के मुताबिक़, सिर्फ़ एनजीओ के शीर्ष पदाधिकारियों को ही ऐसा एफिडेविट दायर करना होता था लेकिन 2019 में हुए दूसरे संशोधन के बाद अब सभी कार्यकर्ताओं व सदस्यों के लिए इसे अनिवार्य कर दिया गया है।

NGO’s को धर्मांतरण से दूर रखने की मांग बहुत पहले से चल रही थीं। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल (मार्च 2015) में जब राजनाथ सिंह गृहमंत्री थे तब उन्होंने कहा था, ‘हम धर्मांतरण किए बिना लोगों की सेवा क्यों नहीं कर सकते? जो लोगों की सेवा करना चाहते हैं, उन्हें यह काम धर्मांतरण में संलिप्त हुए बिना करना चाहिए। क्या हम इस समस्या का समाधान नहीं खोज सकते?’

2017 में अमेरिकी एनजीओ ‘Compassion International’ जो भारत मे 344 NGO’s को धर्मान्तरण के लिए 292 करोड़ रुपये देती थी। FCRA रद्द होने के वजह से उसने भारत मे अपनी गतिविधियां बंद करने की घोषणा की थी। 2014-15 के बीच विदेश से करीब 22 हजार करोड़ रुपया भारत के एनजीओ के खाते में आया। सबसे अधिक पैसा देश की राजधानी दिल्ली के एनजीओ के खातों में आया, जिसमें क्रिश्चियन मिशनरीज आधारित एनजीओ सबसे आगे है।

एफसीआरए के लिए गृह मंत्रालय से अनुमति की ज़रूरत होती है। नए नियमों के अनुसार, अब एक लाख रुपए तक के निजी उपहार प्राप्त करने वालों के लिए सरकार को लिखित जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके पहले ये राशि 25 हजार रुपए थी, जिसे अब बढ़ा दिया गया है। एनजीओ के कार्यकर्ताओं को हलफनामा दायर कर इसकी भी पुष्टि करनी होगी वे विदेशी चंदे का उपयोग राष्ट्रद्रोह वाले कार्यों के लिए नहीं करेंगे।

इसके अलावा अब विदेश में इलाज कराने के लिए भी हलफनामा दायर करना पड़ेगा। अगर कोई व्यक्ति विदेशी यात्रा पर है और उसे इस दौरान इमरजेंसी में विदेशी इलाज की ज़रूरत पड़ती है या फिर उसे विदेशी मदद मिलती है तो उसे एक महीने के भीतर सरकार को इसकी सूचना देनी होगी। सरकार को दी गई सूचना में उसे स्पष्ट करना पड़ेगा कि इस फंडिंग का सोर्स क्या है, भारतीय मुद्रा में उसकी वैल्यू क्या है और इसका इस्तेमाल कहाँ-कहाँ और किन-किन कार्यों में किया गया?

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अभी तक कुल 18,000 ऐसे एनजीओ हैं, जिनका विदेशी चन्दा प्राप्त करने का अधिकार ख़त्म कर दिया गया है। धर्म परिवर्तन कराने वाले और राष्ट्रद्रोही गतिविधियों में शामिल रहने वाले एनजीओ पर शिकंजा कस्ते हुए सरकार एक के बाद एक क़दम उठा रही है।