14 फरवरी को पुलवामा आतंकी हमले के बाद 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में हुई ‘एयर स्ट्राइक’ के बाद कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष मारे गए आतंकियों की संख्या पूछकर और स्ट्राइक को फर्जी बताकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।

लेकिन इसी बीच दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने बड़ा बयान दिया है, जिससे आगे चलकर पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है। उन्होंने आतंक के खिलाफ वर्तमान की मोदी सरकार की नीति की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आतंक के खिलाफ नीति मोदी सरकार से कमजोर थी।

न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, शीला दीक्षित ने कहा, “26/11 के मुंबई हमले के बाद मनमोहन सिंह की प्रतिक्रिया उतनी मजबूत नहीं थी, जितनी पुलवामा हमले के बाद पीएम नरेंद्र मोदी की थी।” सीएनएन न्यूज-18 के पत्रकार वीर सांघवी से बातचीत में उन्होंने आगे कहा, “हां, मैं आपसे सहमत हूं। मनमोहन सिंह वर्तमान प्रधानमंत्री की तरह मजबूत नहीं थे।” हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी यह सब सिर्फ राजनीति के लिए कर रहे हैं।

आपको बता दें कि कांग्रेस आगामी चुनाव के लिए सभी राज्यों में क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के लिए लालायित हैं, लेकिन कांग्रेस की इन तीनों प्रदेश समितियों ने केजरीवाल के साथ गठबंधन की खबरों को खारिज कर दिया है। हालांकि, ऐसी खबर आ रही है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी इन तीनों राज्यों में ‘आम आदमी पार्टी’ के साथ गठबंधन के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं से रायशुमारी कर रहे हैं।

ऐसे में शीला दीक्षित का बयान पार्टी के लिए सिरदर्द बन सकता है, क्योंकि शीला दीक्षित दिल्ली में ‘आप’ के साथ गठबंधन नहीं चाहती हैं और उन्होंने पहले भी केजरीवाल को इसके लिए साफ साफ मना कर दिया है। देखा जाए तो शीला दीक्षित ने इशारों इशारों में ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को आगाह कर दिया है कि अगर दिल्ली में ‘आप’ के साथ गठबंधन हुआ, तो वह पार्टी से अलग हो सकती हैं।

Leave a Reply