एससी एसटी एक्ट का दुरुपयोग शुरू से ही होता रहा है। अपने सवर्ण विरोधी से बदला लेने का यह एक मजबूत हथियार बन चुका है। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में ऐसा ही एक मामला सामने आया है। जिले के एक युवक ने दूसरे बिरादरी के युवक को फंसाने के लिए खुद ही डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की प्रतिमा तोड़ डाली और इसका इल्जाम सवर्ण जाति के एक युवक पर लगा दिया। हालांकि, युवक को प्रतिमा तोड़ते हुए अनुसूचित जाति के लोगों ने देख लिए था, इसलिए निर्दोष युवक जेल जाते जाते बच गया।

यह है पूरा मामला

मैनपुरी के कुरावली थाना क्षेत्र के गांव राजलपुर निवासी दिनेश जाटव उपद्रवी प्रवृत्ति का है। आए दिन वह सवर्णों से किसी न किसी बात को लेकर जबर्दस्ती उलझता रहता है। 22 दिसंबर की रात करीब 9 बजे वह अपने बिरादरी के रामचरन जाटव से गाली गलौच  करने लगा। उसी समय सवर्ण जाति का सत्यपाल उसके पास आया और गाली गलौच तथा शोर शराबा करने से मना किया। सत्यपाल की यह बात दिनेश को नागवार गुजरी और उसने हरिजन एक्ट में फंसाने की धमकी दे डाली।

घटना के कुछ ही समय बाद गांव में आंबेडकर की प्रतिमा टूटी मिली। देखते ही देखते यह बात पूरे गांव में फैल गयी। इसी दौरान दिनेश भी वहाँ पहुंच गया और सत्यपाल पर मूर्ति तोड़ने का आरोप लगाने लगा। दिनेश ने कहा कि उसने सत्यपाल को मूर्ति तोड़ते हुए अपनी आंखों से देखा है।

ग्रामीणों की सूचना पर वहाँ पुलिस भी पहुंच गई। इसी बीच अनुसूचित जाति के लोगों ने ही दिनेश से हुए विवाद के बारे में बताया। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि  दिनेश ने सत्यपाल को जबरन एससी एसटी एक्ट में फंसाने के लिए खुद मूर्ति तोड़ी है। रामचरन जाटव की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी दिनेश को झूठे आरोप में फंसाने की धमकी देने सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया। थानाध्यक्ष ओमहरि वाजपेयी ने बताया कि प्रतिमा की मरम्मत करा दी जाएगी और आरोपित के खिलाफ कड़ी कारवाई की जाएगी।

Report By: @ShivangTiwari_