जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद लगी पाबंदियों पर कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला ने याचिका दायर की थी। पूनावाला ने जम्मू-कश्मीर से कर्फ्यू हटाने, फोन-इंटरनेट और न्यूज चैनल पर लगे प्रतिबंध हटाने की भी मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से इनकार करते हुए कहा कि राज्य में स्थिति संवेदनशील है और सरकार पर भरोसा किया जाना चाहिए।

सरकार को मिलना चाहिए वक्त

सुप्रीम कोर्ट ने मामलें पर सुनवाई करते कहा कि सरकार को राज्य की स्थिति को सामान्य बनाने के लिए समय दिया जाना चाहिए। रातोंरात चीजें नहीं बदल सकती है। ऐसे में राज्य में लगी पाबंदियों पर किसी प्रकार का आदेश नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही कोर्ट ने दो सप्ताह के लिए इस मामले की सुनवाई टाल दी है।

कब तक होंगे हालात सामान्य

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कब तक हालात सामान्य हो सकते है। इस पर सरकार ने कहा- हम राज्य के हालात की हर दिन समीक्षा कर रहे हैं। वहां खून की एक भी बूंद नहीं गिरी, किसी की जान नहीं गई। 2016 में इसी तरह की स्थिति को सामान्य होने में 3 महीने का समय लगा था, ऐसे में सरकार की कोशिश है कि जल्द से जल्द हालात सामान्य हो जाएं।

कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला ने मांग की थी कि कोर्ट पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे नेताओं को रिहा करने का आदेश जारी करे। जमीनी हकीकत की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग की गठन करे। केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर रही है।

पाबंदी हटाने पर गड़बड़ हुई तो कौन लेगा जिम्मेदारी

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, आज जम्मू-कश्मीर की पाबंदियों में ढील दे दी जाए तो अगर ऐसे में वहां कुछ होता तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? कोर्ट ने कहा कि राज्य का मामला संवेदनशील है और सरकार को सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए कुछ समय दिया जाना चाहिए। कोर्ट प्रशासन के हर मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई को 2 हफ्ते के लिए टालते हुए कहा कि सरकार को इस संबंध में पूरी आजादी के साथ कार्रवाई करने की छूट मिलनी चाहिए।