सऊदी अरब के मदीना में इस्लामिक आतंकवाद का बेहद क्रूर रूप देखने को तब मिला जब एक 6 साल के बच्चे की उसकी मां के सामने ही बड़ी ही बेदर्दी से जान ले ली गई। वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि वो शिया मुस्लिम था। कैंपेन ग्रुप शिया राइट वॉच ने इस मामले की खबर दी है। ग्रुप का दावा है कि बच्चे को दिन के वक्त सरेआम ग्लास के एक टुकड़े से गर्दन काटकर मौत दी गई।

क्या हैं मामला
ब्रिटेन से छपने वाले अखबार डेली मेल के मुताबिक ये घटना बीते गुरुवार को सऊदी के मदीना शहर में हुई। 6 साल का जकारिया-अल जबेर अपनी मां के साथ टैक्सी में था और मदीना में मौजूद पैगंबर मोहम्मद के टॉम्ब ग्रीन डोम जा रहा था। तभी सुन्नी टैक्सी ड्राइवर ने महिला से उसका धर्म पूछा पर जवाब में शिया सुनते ही भड़क गया।

जिसके बाद टैक्सी ड्राइवर ने बीच में ही कार रोकी और बच्चे को जबरदस्ती कार से उतारकर कॉफी शॉप पर ले गया। यहां ड्राइवर ने कांच की बोतल तोड़ी और उससे बच्चे का पहले गला रेता और फिर उसे घोंप भी दिया। इस दौरान बच्चे की मां ड्राइवर को रोकने की कोशिश करती रही, लेकिन वो सड़क पर गिर गई। वहां से गुजर रहे लोगों ने पास के स्टॉप पर मौजूद पुलिस को खबर दी और पुलिस ने भी ड्राइवर को रोकने की कोशिश की, लेकिन बच्चे को बचाने में नाकाम रहे।

शिया राइट्स वाच की प्रेस रिलीज
शिया राइट्स वॉच ने बच्चे की मौत पर प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि एक अनजान शख्स ने पवित्र स्थल पर पहुंचने के बाद बच्चे की मां से सवाल किया कि क्या वो शिया मुस्लिम हैं और जब महिला ने हां जवाब दिया तो कट्टरपंथियों ने बच्चे की जान ले ली। एक्टिविस्ट्स का ये भी दावा है कि चश्मदीदों की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे का सिर धड़ से अलग कर दिया गया है, जबकि उसकी मां इस दौरान चीखती-चिल्लाती और सबकुछ देखती रही।

हालांकि शिया और सुन्नी दोनो मुस्लिम होते हैं, लेकिन ये दोनो आपस मे अब इसलिए लड़ रहे हैं कि कौन ज्यादा बड़ा ‘मुसलमान’ हैं। इस लड़ाई में अब इंसानियत बेहद पीछे छूट चुकी हैं। इस्लामिक आतंकवाद की वजह से पूरे विश्व को खतरा पैदा हो गया हैं। म्यांमार में जहाँ इस्लामिक आतंकवादी वहाँ के बौद्ध समुदाय के साथ लड़ रहे हैं तो वही इजराइल में यहूदियों के साथ। ईसाइयों के साथ इनका बैर तो जगजाहिर हैं। सीरिया इराक जहाँ कोई दूसरा धर्म नही हैं तो वहाँ ये आपस में लड़ रहे हैं। भारत में भी इस्लामिक आतंकवाद एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा हैं, यहाँ पर वह दूसरे धार्मिक समुदायों पर अकसर हमले करते रहते हैं, जिसकी वजह से बहुत से मासूमो की जान जाती रहती हैं।

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