सबरीमाला मन्दिर के परम्परागत रीति रिवाज़ो से उलट सुप्रीम कोर्ट द्वारा महिलाओं को प्रवेश दिए जाने के बाद से पूरे दक्षिण भारत में हिन्दू विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, और अब केरल राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित मंदिरों के बोर्ड के खिलाफ भी लोग सड़कों पर उतर आए है।

विरोध प्रदर्शन कर रहे लोग केरल राज्य सरकार द्वारा संचालित मन्दिरो के बोर्ड के खिलाफ भगवान अयप्पा के भक्त, पमप गणपति मन्दिर में एकत्रित हुए और उन्होंने एक अनूठी शपथ ली की वे आज से राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित देवासम बोर्ड की हुंडी में कोई चन्दा नहीं देंगे। इसके बजाय सबरीमाला के समर्थन में भगवान स्वामी सरणमयप्पा के नाम की पर्ची हुंडी में डालेंगे।

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि पिछले वर्ष 168. 84 करोड़ रुपये भगवान अयप्पा मन्दिर को दान के रूप में मिले थे, अगर हिन्दुओ ने सरकार नियंत्रित मन्दिरो को दान देना छोड़ा तो वित्तीय स्तर पर केरला सरकार के लिए यह बहुत बड़ा घाटा साबित होगा।

गौरतलब है की सबरीमाला मन्दिर भी इस बोर्ड के अधीन है। भक्तों की शिकायत है कि त्रावणकोर देवासम बोर्ड का अध्यक्ष पद्मकुमार एक नास्तिक है और वह राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के हाथ की कठपुतली है। पद्मकुमार को भक्तों के हितों की कोई चिंता नहीं है और उनकी रुचि सिर्फ सत्ताधारी सी.पी.एम. के हितों को साधने में हैं।

हाल ही में भाजपा सांसद सुरेश गोपी ने भी आह्वान किया था कि देवासम बोर्ड को वित्तीय योगदान न दिया जाए क्योंकि राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित बोर्ड श्रद्धालुओ के हितों की रक्षा करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाता।

यह मुद्दा सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। लोग अपने परिचितों से अनुरोध कर रहे है कि आप अगर किसी ऐसे मन्दिर में जाते है जो देवासम बोर्ड द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है तो कृपया चन्दा न दे। दक्षिणा देनी भी है तो हुंडी में डालने की बजाय पुजारी के हाथ मे दे जिन्हें बोर्ड बहुत कम पारिश्रमिक देता है। न सिर्फ देवाम बोर्ड बल्कि देश के कई मंदिर जो राज्य सरकार के नियंत्रण में है उनसे श्रद्धालुओं को भारी असंतोष है और संभावना है कि वहां भी दान पेटी में चंदे की बजाय अब से भगवान के नाम की पर्चियां ही डाली जाएंगी।

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