‘आजतक’ हिंदी चैनल के वरिष्ठ और देश के चर्चित पत्रकार रोहित सरदाना को एक बार फिर से ‘विशेष समुदाय’ के लोगो के द्वारा जान से मारने की धमकी ट्विटर पर दी गयी हैं। रोहित सरदाना की इसके पहले भी कई बार जान से मारने की धमकियां दी जाती रही हैं। इसके पहले एक मौलाना ने उनका सर लाने वाले को एक करोड़ रुपया इनाम में देने का फतवा जारी किया था।

अभी जो मामला सामने आया हैं उसमें नवाब सुफियान नाम के शख्स ने ट्विटर पर लिखा कि पीएम से ज्यादा मैं रोहित सरदाना के फिराक में हूँ। हालांकि रोहित सरदाना ने इस धमकी पर पलटवार करते हुए ट्विटर पर लिखा कि ‘नवाब साहब आपका रोमानिया का एड्रेस निकलवा लिया हैं, आपके अड्डे पर जल्दी आता हूँ।” जिसके बाद यह शख्स अपनी गाली गलौज और धमकी की सारी ट्वीट डिलीट कर भाग गया।

बहरहाल जान से मारने की धमकियां रोहित सरदाना को क्यों दी जाती हैं यह बड़ा सवाल हैं, लेकिन इस सवाल का जवाब तलाशने के पहले इसका जवाब तलाशना जरूरी हैं कि आखिर ये कौन लोग हैं जो रोहित सरदाना से इस हद तक नफरत करते हैं कि उन्हें जान से मारना चाहते हैं।

हमने ट्विटर पर रोहित सरदाना से नफरत करने वाले कुछ ट्विटर यूजर्स की पड़ताल की, जिसके बेहद चौकाने वाले नतीजे सामने आए। इन सभी यूजर्स में एक कॉमन बात यह दिखी की इनकी पूरी ‘ट्विटर वाल’ साम्प्रदायिक नफरत वाले ट्विट्स से भरी पड़ी हैं। ये कश्मीरी आतंकवादियों और पत्थरबाजों का समर्थन करते हैं। अफजल गुरु जैसे खूंखार आतंकी को निर्दोष समझते हैं और ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ जैसे नारों के समर्थन करते हैं।

अब ऐसे लोगो से आप क्या उम्मीद करते हैं? रोहित सरदाना एक दबंग पत्रकार के तौर पर जाने जाते हैं। वह हर मुद्दे पर खुलकर बोलते हैं, राजनैतिक दलों के प्रवक्ता उनके तीखे सवालों के सामने निरुत्तर हो जाते हैं। ‘आजतक’ पर उनका आने वाला डिबेट शो दंगल लगातार नम्बर वन बना हुआ हैं इसका सिर्फ एक कारण हैं वह जनता की बात उठाते हैं, निष्पक्ष तरीके से उन मुद्दों को भी उठाते हैं जिस पर तथाकथित धर्मनिरपेक्षता का ढोल पीटने वाले पत्रकार ‘टोन डाउन’ कर लेते हैं। वह ट्रिपल तलाक पर बोलते हैं, वह हलाला पर बोलते हैं, वह आतंकवाद के कारणों पर बोलते हैं और दूसरी तरफ वह हिन्दुओ के अतिवादी संगठनों के खिलाफ़ भी बोलते हैं।

उनका यही अंदाज ऐसे लोगो को पसन्द नही आता, उन्हें लगता हैं कि रोहित सरदाना जैसे बाकी के धर्म निरपेक्षता का ढोंग करने वाले पत्रकार करते हैं वैसा क्यों नही करते की उनकी नकारात्मक खबरे दबा दे, उनके गलत कार्यो के पक्ष में तर्क गढ़कर उनका बचाव करें, वह सच क्यों बताते हैं। बस यही बात उन्हें बुरी लगती हैं। अब सच्ची पत्रकारिता तुष्टिकरण करके तो नही हो सकती ना! इसलिए धमकियों से उनकी जुबान बन्द कराना चाहते हैं जो मुमकिन नही हैं क्योकि अगर मुट्ठी भर लोग उनसे नफरत करते हैं तो लाखों उनके चाहने वाले भी हैं।

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