12 जुलाई को पिठोरिया की अंजुमन कमेटी ने ऋचा भारती की फेसबुक पोस्ट को लेकर शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत दर्ज कराने के 2 घण्टो के भीतर ही रांची पुलिस ने 19 वर्षीय ऋचा को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था। उसके बाद जज द्वारा कुरान बांटने का अजीबोगरीब फरमान आना, फैसले का सोशल मीडिया पर विरोध होना और फिर जज का फैसला वापस लेना, ये सारी घटना तो सबको ज्ञात है।

ऋचा मामलें में पुलिस की फुर्ती देख कर सब हैरान हो गए, यहाँ तक कि उसे तीन दिन किसी अपराधी की तरह जेल में गुजारना पड़ा। लेकिन वही हैरान कर देने वाली बात यह है कि एक ‘समुदाय विशेष’ की आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट पर रांची पुलिस कोई कार्रवाई नही करती।

बता दें, सिर्फ रांची में पिछले कुछ महीनों में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिन्दू धर्म और उनके देवी देवताओं पर आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर कई मामलें दर्ज करवाये। लेकिन लोग पुलिस की कार्यप्रणाली देख कर बेहद हैरान है कि जो पुलिस ऋचा को गिरफ्तार करने में मात्र कुछ घण्टे लगाती है, वही पुलिस, इन मामलों में उतनी तेजी नही दिखा पा रही है।

सामाजिक कार्यकर्ता अमृत रमन ने 28 जून को रांची कोतवाली में मोजाहिद पठान की भगवान श्रीराम पर बेहद आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट को लेकर शिकायत दर्ज करवाई थी।

इस मामले में रमन ने बताया कि, मोजाहिद पठान पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295 (ए) और 153 (ए) के तहत मामला दर्ज किया गया था और एक जांच अधिकारी को उसी दिन सौंपा गया था (केस नंबर 174/2019) लेकिन रांची पुलिस ने आज तक कोई कार्रवाई इस मामले पर नही की।

जिसकी वजह से मुजाहिद पठान के हौसले बढ़े हुए है। फेसबुक पर धर्म को लेकर ऐसी वल्गर पोस्ट ना करने की बार-बार चेतावनी देने के बाद भी पठान नही मान रहा है। यहाँ तक कि वह हर चेतावनी के बाद और ज्यादा धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाली पोस्ट करता है।

ऐसा ही एक केस सनी कुमार साहू और विपुल मिश्रा ने रांची के सुखदेव नगर थाने में 4 जुलाई को सैयद अज्जू के खिलाफ दर्ज करवाया है। शिकायतकर्ताओं ने अपनी शिकायत में कहा कि, अज्जू भगवान श्री राम और माता सीता को लेकर आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट कर रहा है, जो उनके समुदाय के लिए अपमानजनक है और उसकी इन फेसबुक पोस्ट से सांप्रदायिक दंगा भड़कने और क्षेत्र की शांति भंग करने की आशंका है, उसके इस फेसबुक की वजह से हिन्दुओ में भारी रोष है। पुलिस ने उसी दिन आईपीसी की धारा 295 के तहत मामला दर्ज किया लेकिन पुलिस द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई इस मामले पर नहीं हुई है।

अमृत रमन, निखिल शर्मा, और शुभम पुरोहित समेत कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को 4 जुलाई को लिखे एक पत्र में एक सलीम चिश्ती के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया, जो कथित रूप से आहत करने वाली साम्प्रदायिक फेसबुक पोस्ट कर रहा था। उन्होंने यह भी शिकायत की थी कि सरायकेला में तबरेज़ अंसारी की पैरवी के विरोध में चिश्ती ने मुसलमानों द्वारा भारत बंद के बारे में फर्जी खबरें फैलाईं। इस मामले में भी पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नही की।

उसी पत्र में, रमन और अन्य लोगों ने पुलिस को रांची में 5 जुलाई को होने वाले संभावित हंगामे के बारे में भी बताया था। इस पत्र में उन्होंने आयोजक डॉ मौलाना अब्दुल्ला के खिलाफ सारी जानकारी रांची पुलिस को उपलब्ध करवाई थी लेकिन रांची पुलिस ने समय रहते कोई कार्रवाई नही की। जिसके परिणामस्वरुप रांची शहर 5 जुलाई को घण्टो दंगाईयो के कब्जे में रहा।

शिकायतकर्ताओ का कहना है कि ‘पुलिस हमारी शिकायतों को स्वीकार तो कर लेती है लेकिन उन्हें एफआईआर में परिवर्तित नहीं करती है। आईटी सेल प्रोफाइल की जांच करेगा जैसे बहाने बनाकर इन मामलों को टालने की कोशिश करते हैं। जबकि ऐसे मामलो में जब हिन्दू आरोपी रहे तो पुलिस मात्र चंद घण्टो में कार्रवाई करती हैं, जैसा कि ऋचा भारती मामले में हुआ।

ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है की पक्षपातपूर्ण कारवाई क्यों कि गयी। क्या झारखंड पुलिस ने खुली छूट दे रखी है धर्म विशेष से जुड़े लोगों को? एक हिन्दू लड़की की गिरफ्तारी हो जाती है पर इन मुस्लिम लड़को की नहीं होती जबकि इनका अपराध ज्यादा गंभीर हैं।