पुलवामा आतंकी हमले के बाद आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर चीन ने एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अड़ंगा लगा दिया है। यह चौथा मौका था, जब चीन ने वीटो पावर का इस्तेमाल कर प्रस्ताव को गिरा दिया। पिछले 10 सालों में चीन ने यह चौथी बार ऐसा किया है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि चीन क्यों बार बार ऐसा कर रहा है? यहाँ हम इसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश करेंगे।

हालांकि इसमें कोई शक नहीं है कि चीन के लिए पाकिस्तान ही प्राथमिकता पर है और उसका सदाबहार दोस्त भी। मसूद अजहर पाकिस्तान से आतंकी संगठन की गतिविधियों को अंजाम देता है। अगर अजहर वैश्विक आतंकी घोषित हो जाता तो पाकिस्तान को उसकी सारी संपत्ति जब्त करनी पड़ती और उसकी आवाजाही पर बैन लगाना पड़ता। चीन पाकिस्तान को खुश करने की हर कोशिश करता रहता है लेकिन इसके अलावा मसूद अजहर को बैन ना करने के पीछे चीन का एक अलग डर भी है।

दरअसल, चीन दक्षिण एशिया में अपने सदाबहार दोस्त पाकिस्तान का बचाव करने से ज्यादा अपने आर्थिक हितों को साधने में लगा हुआ है। चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) चीन की महत्वाकांक्षी योजना बेल्ट ऐंड रोड (BRI) का अहम हिस्सा है। BRI के तहत चीन सड़क, रेल और समुद्रीय मार्ग से एशिया, यूरोप और अफ्रीका में अपनी पहुंच बनाएगा।

चीन को डर है कि जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ किसी भी फैसले से उसका बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) प्रभावित हो सकता है। चीन का CPEC प्रोजेक्ट पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है जो जैश-ए-मोहम्मद का निशाना बन सकता है।

आपको बता दें, सीपीईसी ना केवल पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) और गिलिगिट-बालटिस्तान से होकर गुजरता है बल्कि खैबर पख्तूनख्वा के मनसेरा जिले में भी फैला है। इसी खैबर पख्तूनख्वा में ही बालाकोट स्थित है जहां पर जैश के कई आतंकी कैंप स्थित हैं। चीन ने हाल ही में बालाकोट के नजदीक सीपीईसी के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण किया था। इसके अलावा, पाकिस्तान को चीन से जोड़ने वाला कराकोरम हाईवे भी मनसेरा से ही होकर गुजरता है।

सीपीईसी से जुड़ी इन परियोजनाओं में करीब 10,000 चीनी नागरिक काम कर रहे हैं जिनकी सुरक्षा भी दांव पर लगी हुई है। इसके अलावा चीन ने सीपीईसी के करीब 45 परियोजनाओं में करीब 40 अरब डॉलर का निवेश किया है जिसमें से आधे प्रोजेक्ट पूरे होने को हैं। चीन किसी भी सूरत में अपने भारी-भरकम आर्थिक और समय के निवेश की सुरक्षा चाहता है। पाकिस्तान के साथ अच्छे रिश्तों की वजह से जैश जैसे आतंकी संगठनों से सीपीईसी परियोजना और उसमें काम कर रहे हजारों चीनी नागरिकों को सुरक्षा मिल जाती है।

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