राँची के पिठोरिया में ग्रेजुएशन के तीसरे साल में पढ़ाई करने वाली एक युवती (ऋचा पटेल) पर आरोप है कि उसने फेसबुक और व्हाट्सएप के जरिए धर्म-विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इससे समुदाय विशेष के लोग आहत हो गए। खबरों के मुताबिक युवती ने फेसबुक की किसी पोस्ट पर कमेंट किया था, जिसकी वजह से विशेष समुदाय के लोग भड़क गए और ग्रेजुएशन कर रही एक युवती को जेल जाने तक की नौबत आ गई।

यह मामला झारखण्ड के पिठौरिया का है जहाँ ऋचा पटेल नामक एक युवती ने मॉब लिंचिंग का शिकार हुए तबरेज़ अंसारी पर लिखी गई किसी मित्र की पोस्ट पर कमेंट का जवाब दिया और उस जवाब से धर्म विशेष के लोग नाराज़ हो गए और ऋचा के खिलाफ FIR लिखा दी गई। कमेंट करने के महज़ दो घंटे के भीतर ही ऋचा पटेल को गिरफ्तार करके सलाखों के पीछे डाल दिया गया। इस देश में ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ पर सिर्फ कुछ अमीर और विशेष विचारधारा के पत्रकार बुद्धिजीवियो का ही है, यह ऋचा भूल गयी थी।

बहरहाल, अंजुमन इस्लामिया कमेटी पिठौरिया ने लड़की की फ़ेसबूक पोस्ट को आपत्तिजनक और धार्मिक भावना को आहत करने वाला बताते हुए उसके खिलाफ पिठोरिया थाने में एफआईआर दर्ज करा दिया। इसके बाद पुलिस ने अंजुमन इस्लामिया कमिटी की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 2 घंटे के भीतर उस युवती को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जानकारी के मुताबिक, इस्लामिया कमिटी द्वारा 4 बजे आवेदन किया गया था और 6 बजे लड़की को थाने ले जाया गया और फिर जेल में डाल दिया गया। इससे आक्रोशित लोगों का कहना है कि युवती को दो घंटे के अंदर जेल भेज दिया गया, जबकि कई गंभीर टिप्पणी करने वाले बाहर हैं।

इस गिरफ्तारी पर दुसरे पक्ष के लोग फेसबुक पोस्ट को सामान्य बताते हुए युवती ऋचा की गिरफ्तारी का विरोध करने लगे। नाराज ग्रामीणों ने थाने का घेराव कर दिया। लोग युवती की अविलंब रिहाई की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। साथ ही, थाना प्रभारी विनोद राम को हटाने की मांग को लेकर नारेबाजी करने लगे।

गिरफ्तार लड़की के समर्थन में विश्व हिंदू परिषद, आरएसएस, बजरंग दल, हिंदू जागरण मंच के राँची जिला के पदाधिकारी भी थाना पहुँचे। लोगों ने थानेदार पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि अगर जिस धर्म को लेकर लड़की ने टिप्पणी की है, तो उसी धर्म के लोगों ने प्रतिक्रिया में लड़की के धर्म को लेकर भी बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की है। ऐसे में जब मामला दोनों तरफ से था तो फिर कार्रवाई एकतरफा क्यों की गई?

कई घंटे तक लोग थाने को घेरे रहे। स्थिति को देखते हुए ग्रामीण एसपी आशुतोष शेखर, एडिशनल एसपी अमित रेणु सहित अन्य वरीय पुलिस पदाधिकारी पिठोरिया थाना पहुंचे। ग्रामीणों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर मामले को शांत कराया। इस बात पर सहमति बनी कि युवती को सोमवार को बेल पर रिहा कर दिया जाएगा। वहीं, पूरे मामले की छानबीन करने की बात भी प्रशासन की ओर से कही गई।

इन दिनों धर्म और संप्रदाय को लेकर लोगों के बीच काफी रोष का माहौल व्याप्त है। लोग अपनी सोशल मीडिया वॉल पर किसी धर्म को लेकर कुछ भावनाएँ व्यक्त करते हैं तो समुदाय विशेष द्वारा उसे सांप्रदायिक तनाव का कारण करार दिया जाता है। इसे आपसी सौहार्द्र बिगाड़ने की कोशिश बताते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही जाती है। दूसरी तरफ प्रशासन के लिए डर का माहौल कुछ इस कदर है कि इन मामलों में पुलिस भी बिना जाँच किए त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपित को जेल में डाल देती है। यही कुछ रांची में हुआ।

पुलिस माहौल बिगड़ने से बचाने के लिए कार्रवाई तो तुरंत कर देती है पर ऐसा करते वक़्त किसी जांच की ज़रुरत नहीं समझी जाती, और इस बात में धर्म विशेष के लोगों को छूट मिली हुई है चूँकि सोशल मीडिया से सम्बंधित मामलों में या तो उनके खिलाफ FIR लिखी नहीं जाती या फिर लिखने के बाद भी तुरंत तो छोड़ दीजिये कभी कार्रवाई ही नहीं होती। हसनैन खान और team07 द्वारा टिकटोक पर कुछ दिन पहले दी गई धमकी इसकी बिलकुल ताज़ा उदहारण है। आरोपी खुुले घूम रहे है और पुलिस को उन्हें गिरफ्तार करने की हिम्मत नही हो रही, प्रशासन का सारा गुस्सा ऋचा पटेल जैसी युवतियों पर निकलता है।

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