देश की मीडिया अक्सर दलित दूल्हों को दबंगों द्वारा घोड़ी से उतारने के मामले प्रमुखता से उठाती रहती है, लेकिन  राजस्थान के राजपूत भाइयों ने जो सामाजिक सद्भाव की अनूठी मिसाल पेश की है इसकी चर्चा तक नही करती है। राजस्थान के पाली जिले के इन राजपूत भाइयों ने गांव के दलित परिवार की बेटियों की शादी कर उन्हें बड़े लाड प्यार से विदा किया है, लेकिन मीडिया के लिए यह खास खबर नही है।

सामाजिक ताने-बाने को मजबूत बनाने वाला यह मामला राजस्थान के पाली जिले में मारवाड़ उपखण्ड मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर धनला गांव का है। यहां रहने वाले चार राजपूत भाइयों ने अपने पिता की इच्छा पर गांव में ही रहने वाले मेघवाल परिवार की दो बेटियों की न केवल उनके पिता बनकर शादी कराई बल्कि पूरी रस्में भी अदा निभाई। इन चार भाइयों की पहल को पूरे गांव ने सराहा और पूरा गांव इन बेटियों की शादी का साक्ष्य बना।

जानकारी के मुताबिक धनला गांव के आरएमजीबी में अस्थाई संदेशवाहक (मैसेंजर) की नौकरी करने वाले चम्पालाल मेघवाल की बड़ी बेटी मनीषा तथा छोटी बेटी संगीता की शादी थी। पिता की आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने की वजह से गांव के कुशालसिंह ने मेघवाल समाज की दो बेटियों की शादी का पूरा खर्च उठाया। साथ ही दोनों बेटियों को अपने ही घर से विदा किया।

प्रेमसिंह की इच्छा को बेटों ने पूरा किया

खुशहाल सिंह कुंपावत ने बताया कि धनला गांव के स्वर्गीय प्रेमसिंह अपने जीवन में सामाजिक भेदभाव को खत्म करने के लिए हर सम्भव प्रयास किया करते थे। उनका मानना था कि सामाजिक रूप से कमजोर जातियों को भी उतना ही अधिकार हैं। जितना स्वर्ण जातियों को। अपने अंतिम समय में उन्होंने इसी विचारधारा को आगे बढ़ने के लिए अपने चार पुत्रों कुशालसिंह, देवेन्द्रसिंह, खुशवीरसिंह व तेजपालसिंह को जिम्मेदारी सौंपी। पिता के इस पुनीत कार्य को आगे बढ़ने की ठानकर इन भाइयों ने यह पहल की और अपने पिता के सपने को पूरा किया।

बारातियों ने भी सराहना

इन चारों भाइयों की पहल को पूरे धनला गांव और आस-पास के गांवों के लोगों ने सराहा। इन दो बेटियों की शादी एक यादगार पल बने। इसके लिए पूरे गांव को सजाया गया। सभी ग्रामीणों ने बेटियों की शादी में उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे विवाह को संम्पन्न करवाने की जिम्मेदारी अलग अलग लोगों ने ली। सबसे खास बात यह रही कि इन दोनों युवतियों की बारात में आए लोगों ने भी इस पहल की जमकर तारीफ की।