कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कांग्रेस को मुस्लिमो की पार्टी बताया है। उनके इस बयान जहाँ राजनितिक घमासान शुरू हो चूका है वहीँ दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी के तुष्टिकरण की राजनीती करने का रवैया फिर से सामने आ गया है।

दरअसल उर्दू अख़बार इंकलाब ने यह खबर छापी थी कि मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ हुई बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा है कि कांग्रेस मुसलमानो की पार्टी है। राहुल गाँधी ने इस बैठक में कहा कि मैं और मेरी माँ मुस्लिम अधिकारों के संरक्षण और उन्हें उनका पूरा हक़ मिले इसे पुरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुस्लिम वरिष्ठ नेताओ और बुद्धिजीवियों के साथ हुई ये बैठक काफी चर्चा में है और सत्तारूढ़ पार्टी ने तीखे सवाल खड़े किये हैं वहीँ कांग्रेस पार्टी ने इस मीटिंग को महज विचारों का आदान प्रदान बताया है। भाजपा ने कांग्रेस पार्टी से कहा है कि वो देश को बताये, की उन्होंने कांग्रेस को मुस्लिम पार्टी क्यों कहा। भाजपा ने कांग्रेस अध्यक्ष के इस बयान को देश को जाती और धर्म के आधार पर बाँटने वाला बयान बताया और कहा कि देश में अगर कोई भी तनावपूर्ण स्थिति बनती है तो उसके लिए कांग्रेस पार्टी जिम्मेदार होगी।

सवालो के घेरे में राहुल गाँधी और पूरी कांग्रेस पार्टी इसलिए भी है क्योकि चार राज्यों के चुनाव के वक़्त राहुल गाँधी को जनेऊधारी हिन्दू और शिवभक्त बताया था। राहुल गाँधी वोट भुनाने के लिए मंदिरो में भगवन के दर्शन के लिए रोजाना जाया करते थे और इसे मिडिया ने भी इस मुद्दे को खूब उछाला था। भाजपा का कहना है राहुल गाँधी ने अपने बयान से ये साबित कर दिया है कि कांग्रेस धर्म की आड़ में राजनीती करती है और वोट बैंक की खातिर लोगो को बाँटने का काम करती है। वही कोंग्रेसी नेता रणदीप सुरजेवाला राहुल गाँधी के बचाव में ये कह रहे हैँ कि कांग्रेस सभी धर्मो की पार्टी है और भाजपा देश को भ्रमित करने की राजनीती कर रही है।

प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गाँधी के इस बयान पर कांग्रेस को आड़े हाथो लिया और सवाल किया क्यों कांग्रेस पार्टी तीन तलाक के मुद्दे पर खुलकर सामने नहीं आती, क्या कांग्रेस बस मुस्लिम पुरुषो की पार्टी है, मुस्लिम महिलाओ की नहीं?