प्रयाग कुंभ में इस बार कई बंद हो चुकी परंपराओं की शुरुआत हुई हैं। ऐसी ही एक परम्परा पंचकोसी परिक्रमा की थी जिसे 550 साल पहले क्रूर और धर्मांध मुगल शासक अकबर ने बन्द करवा दी थी। जिसे उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पुनः शुरू करवा कर हिन्दुओ को उपहार दिया हैं। संगम नोज पर साधु संतों और मेला प्रशासन के अधिकारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना के बाद पांचकोसी परिक्रमा शुरू की।

श्रद्धालु जुड़ेंगे प्रयाग के धार्मिक महत्व से

इसके जरिए देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं को प्रयाग के धार्मिंक महत्व से जोड़ा जाएगा। प्रयाग की परिक्रमा 550 सालो से बंद है। आपको बता दें, हिन्दुओ की हर धार्मिक नगरी में पंचकोसी परिक्रमा होती हैं, लेकिन प्रयाग की यह धार्मिक परम्परा धर्मांध और क्रूर मुगल शासक अकबर ने हिन्दू समुदाय को नीचा दिखाने के लिए बन्द करवा दी थी। आजादी के बाद भी संत समाज इसके लिए पुरजोर मांग करता रहा हैं लेकिन तथाकथित धर्मनिरपेक्ष सरकारें ने इस मांग को उपेक्षित ही रखा था।

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी की वजह से पुनः हुई शुरू

बता दें बीते दिनों प्रयाग पहुचें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने द्वादश माधव और पंचकोसी परिक्रमा को पुनर्जीवित करने तथा इस परिक्रमा मार्ग में प्रकाश शौचालय सुविधाओं को जोड़ते हुए इस पर आने वाले प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार और सुन्दरीकरण करने का निर्देश दिया था। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिला और मेला प्रशासन द्वादश माधव मंदिरों का जीर्णोद्धार और सुन्दरीकरण की रूप रेखा तैयार की गई और इस पर युद्धस्तर पर कार्य हुआ जिसकी वजह से प्रयाग पंचकोसी की यह परिक्रमा पुनर्जीवित की जा सकी।

पहले दिन का कार्यक्रम
तीन दिवसीय इस परिक्रमा के पहले दिन अक्षयवट और सरस्‍वती कुंड के बाद जलमार्ग द्वारा बनखंडी महादेव और मौजगिरी बाबा के दर्शन किए जाएंगे। मौजगिरी मंदिर भृगु ऋषि का स्‍थान माना जाता है। उसके बाद सूर्य टंकेश्‍वर महादेव के दर्शन करते हुए, चक्र माधव और गदा माधव होते हुए परिक्रमा सोमेश्‍वर महादेव के मंदिर पहुंचेगी। उसके बाद दुर्वासा ऋषि के आश्रम के दर्शन करने बाद शंख माधव मंदिर होते हुए पहला दिन पूरा होगा।

दूसरे दिन का कार्यक्रम
दूसरे दिन की परिक्रमा में कोतवाल हनुमान जी के दर्शन करने के बाद दत्तात्रेय मंदिर, चेतनपुरी के साथ ही उत्तर में स्थित पांडेश्‍वर महादेव होते हुए वासुकी मंदिर आदि के दर्शन करते हुए भजन कीर्तन के साथ पूरी होगी।

अंतिम दिन का कार्यक्रम
परिक्रमा के आखिरी दिन श्रद्धालुओं की टोली संगम से गंगाजल लेकर प्रयागराज स्थित भरद्वाज ऋषि के आश्रम में जाकर अभिषेक करेगी। इसी के साथ तीन दिवसीय परिक्रमा का समापन होगा।

कुम्भ में मुगलों की बन्द कराई कई परम्परा पुनः शुरू हुई
आपको बता दें, इस बार के कुम्भ मेला में मुगलों की बन्द कराई कई परम्परा पुनः शुरू हुई। अकबर के किले में कैद अक्षय वट और सरस्वती कूप जिनका धार्मिक दृष्टि से काफी महत्व रहा है उसे श्रद्धालुओं के लिए सुगम बना दिया गया। इस बार श्रद्धालु भगवान राम और कृष्ण से संबंधित अक्षय वट के दर्शन कर पा रहे हैं। अब श्रद्धालु सरस्वती कूप के भी दर्शन का लाभ ले पा रहे हैं। पंचकोसी यात्रा का आरंभ अकबर के समय में बंद हो चुकी तीसरी बड़ी परंपरा का आरंभ माना जा रहा है।

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