यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ पर विवादित टिप्पणी लिखने और विडियो शेयर करने के मामले में गिरफ्तार पत्रकार प्रशांत कनौजिया को सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। हालांकि कोर्ट ने कहा है कि प्रशांत कनौजिया पर केस चलता रहेगा।

गौरतलब है कि पत्रकार प्रशांत कनौजिया पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट साझा करने को लेकर मामला दर्ज किया गया था। प्रशांत ने 6 जून को अपने ट्विटर हैंडल पर ‘इश्क छुपता नहीं छुपाने से योगी जी’ पोस्ट की थी। साथ ही एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें एक युवती मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर खड़ी होकर खुद की योगी आदित्यनाथ की प्रेमिका बता रही थी। प्रशांत इससे पहले भी योगी आदित्यनाथ पर उनके जन्मदिन पर टिप्पणी कर चुका है।

प्रशांत कनौजिया की नफरत भरी ट्वीट

सिर्फ यही नही पत्रकारिता की आड़ में नफरत का एजेंडा चलाने वाला प्रशांत सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार हिन्दू सन्तो और हिन्दू समुदाय के खिलाफ नफरत भरी ट्वीट्स करता रहता है। उसने ट्विटर पर की अपनी एक ट्वीट में सभी हिन्दू सन्तो की हत्या किए जाने की बात कही थी। सिर्फ यही नही उसने कहा कि हिंदू धर्म इस धरती पर सबसे बेकार धर्म है और जो दलित खुद को हिन्दू कहते है वह जानवर है।

प्रशांत कनौजिया ने हिन्दू दलितो को बताया पशु

 

यहाँ तक कि हिन्दुओ के आराध्य भगवान राम पर भी अशोभनीय ट्वीट लिखी थी।

प्रशांत कनौजिया की भगवान राम पर अशोभनीय टिप्पणी

आपको बता दें, पत्रकार प्रशांत कन्नौजिया की पत्नी ने कल सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका पर आज सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी की निजी आजादी का हनन हो रहा है तो हम हस्तक्षेप करेंगे। नागरिकों की स्वतंत्रता सर्वोपरि है और संविधान इसकी गारंटी सुनिश्चित करता है। इस अधिकार के साथ छेड़छाड़ नहीं हो सकती है।

इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि, कनौजिया को जमानत देने का यह मतलब नहीं है कि सोशल मीडिया पर लगाया गया उनका पोस्ट सही है। शीर्ष अदालत ने कहा, ‘प्रशांत कनौजिया ने जो शेयर किया और लिखा, इस पर यह कहा जा सकता है कि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। लेकिन, उसे अरेस्ट किस आधार पर किया गया था?’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आखिर एक ट्वीट के लिए उनको गिरफ्तार किए जाने की क्या जरूरत थी।

अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि, अगर किसी को उसकी नफरत भरी ट्वीट के लिए गिरफ्तार नही किया जा सकता है, तो फिर क्या किया जाना चाहिए? ऐसे लोगो को अगर कानून का डर नही होगा तो ये लोग समाज में धर्म और जाति के नाम पर नफरत की आग लगा देंगे। सोचिये, अगर कानून का डर खत्म हो गया तो लोग सोशल मीडिया को नफरत का अड्डा बना देंगे, एक दूसरे के खिलाफ फर्जी खबरो के सहारे नफरत फैलायेंगे। शीर्ष अदालत को अगर यह लगता है कि प्रशांत कनौजिया ने जो कुछ भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया वह अपरिहार्य था, गलत था तो इसको लेकर कम से कम एक गाइडलाइन जरूर बनानी चाहिए ताकि लोग अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का सही मतलब समझ सके। अपनी लक्ष्मण रेखा समझ सके और उन्हें इसका भय हो कि अगर लक्ष्मण रेखा पार की तो कानून अपना काम करेगा।

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  1. This bigot Prashant Jagdish Kanojia is unfit to live in Indian society. This scum will never live happily and will spread unhappiness. @Pjkanojia has called upon himself. Poor guy shouldering sins of his upbringing.