तालकटोरा थानाक्षेत्र के राजाजीपुरम के सेक्टर-11 में शनिवार रात आठ बजे एक स्वागत समारोह में मुस्लिम समुदाय ने देश विरोधी व पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए। पिछले हफ्ते भर से वामपन्थी मीडिया यह माहौल बनाने में लगी हैं कि अयोध्या में हो रही धर्मसभा की वजह से मुस्लिम डरे हुए हैं, लेकिन वह हिन्दुओ के इस डर के बारे में बात नही कर रही। मामला सिर्फ पाकिस्तान जिन्दाबाद के नारे लगाने तक सीमित नही था, बल्कि खुले मंच से हिन्दू समुदाय के लोगो को इलाका छोड़ने के लिए धमकाया गया। जबकि मंच पर एक प्रदेश स्तर का अधिकारी भी मौजूद था। आरोप है कि अधिकारी ने भी इसका विरोध नहीं किया। यही नहीं, विरोध करने पर स्थानीय लोगों को गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी गई।

 

दरअसल मामला यह हैं कि, राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान लखनऊ के राजापुरम इलाके में शनिवार (24 नवंबर) की रात एक आयोजन में शामिल होने पहुंचे थे। इसी दौरान भारत विरोधी नारे लगाए गए। नारा लगाने के आरोप में दो स्थानीय मुस्लिमो के ऊपर देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है। जबकि वही इस मामले में 40 से 45 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भी इसी धारा में मामला दर्ज किया गया है।

 

 

तालकटोरा पुलिस थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार, अली शहजेब खान, शादात उस्मान और कुछ अज्ञात लोगों ने कार्यक्रम में ‘भारत मुर्दाबाद’, ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ जैसे भारत विरोधी नारे लगाए। साथ ही इसका विरोध करने वालों को धमकी भी दी। घटना के बाद सैंकड़ों की संख्या में लोगों ने आरोपी के घर के बाहर प्रदर्शन किया। हालात को तनावपूर्व देख पुलिस और पीएसी जवानों को पूरे क्षेत्र में तैनात किया गया है। आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

 

 

राजपुरम के रहने वाले स्थानीय व्यक्ति अभय प्रताप सिंह ने अपनी शिकायत में कहा है, “शनिवार की रात करीब 8 बजे अली शहबेज खान और शादात उस्मान के द्वारा एक स्वागत समारोह का आयोजन किया गया था। राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान मुख्य अतिथि थे। वहां 40 से 45 अन्य लोग भी मौजूद थे। इसके बाद वहां भारत विरोधी नारे लगने लगे। जब स्थानीय लोगों ने विरोध किया तो उन्होंने हमें धमकी दी। उन्होंने हिंदुओं को भारत छोड़ने की धमकी दी।”

 

हालांकि उस्मान से जब इस मामले में मीडिया ने बात की, तो उन्होंने कहा कि जब वे वहां मौजूद थे तो इस तरह का कोई नारा नहीं लगाया गया था। उन्हें चाय पर बुलाया गया था। इसके बाद वे वहां से तुरंत निकल गए। उन्होंने कहा, “मुझे चाय पर बुलाया गया था, इसलिए मैं वहां गया था। वहां कोई न तो स्टेज था और न हीं कोई औपचारिक कार्यक्रम। मैं वहां शाम करीब 7:30 में पहुंचा था। जहां तक मुझे जानकारी है, ऐसा कुछ नहीं हुआ था।”

बहरहाल यह जांच का विषय हैं, क्योकि स्थानीय समुदाय के लोगो का कहना हैं कि उस्मान वहाँ नारेबाजी के समय मौजूद थे, और एफआईआर में भी उनका नाम हैं।