इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने दो हिंदू लड़कियों को उनके पति के पास भेजने का आदेश दे दिया है। पिछले महीने (मार्च) होली के पवित्र त्योहार के दिन पाकिस्तान के सिंध प्रांत के घोटकी से दो नाबालिग हिंदू लड़कियों, रवीना और रीना, का इस्लामिक कट्टरपंथियों ने अपहरण कर लिया था। इसके बाद उन्हें जबरन इस्लाम में दीक्षित करने के बाद अपने से दुगुने मुस्लिम व्यक्ति से जबरन शादी भी करा दिया गया था।

अब इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने इन दोनों लड़कियों को उनके पति बरकत अली और सफ़दर अली के पास भेजने का फ़रमान सुनाते हुए अल्पसंख्यकों की उम्मीदों को फिर से तोड़ दिया है। इससे पहले हाईकोर्ट ने 5 सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया था। इस जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि लड़कियों ने अपने मुस्लिम प्रेमी से निकाह करने के लिए स्वेच्छा से इस्लाम को स्वीकार किया है।

हालांकि, कोर्ट ने आयोग के एक अन्य सदस्य से इस बारे में उनकी राय जाननी चाही, तो अधिवक्ता आईए रहमान ने कहा कि ऐसा कोई कानून नहीं है, जो विभिन्न केंद्रों पर धड़ल्ले से चल रहे धर्मांतरण को रोक सके। उन्होंने कहा कि न्यायालय ऐसे केंद्रों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कारवाई करने का आदेश जारी करे।

मालूम हो कि हिंदू लड़कियों का यह मामला सामने आने के बाद भारत सरकार की विदेश सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर पाकिस्तान सरकार को लताड़ लगाई थी और उन लड़कियों को वापस उनके घर भेजने की बात कही थी। इसके अलावा पाकिस्तान सरकार पर वहां के हिंदू समुदाय के प्रबुद्ध वर्ग तथा दूसरे देशों में रह रहे पाकिस्तानी हिंदूओं ने विरोध प्रदर्शन कर दबाव बनाया था, जिसके बाद पुलिस ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ यह कोई पहला मामला नहीं है। वहां हर वर्ष भारी संख्या में अल्पसंख्यकों को या तो जबरन इस्लाम में दीक्षित कर दिया जाता है या मार दिया जाता है।