17वीं लोकसभा के चुनाव संपन्न हो चुके हैं। सिर्फ पश्चिम बंगाल को छोड़ दें, तो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में बिना हिंसा हुए 7 चरणों में चुनाव संपन्न हुए। 19 मई को आखिरी चरण का मतदान था, जिसके बाद उसी दिन शाम 6 बजे के बाद से समाचार चैनलों ने एग्जिट पोल दिखाना शुरू कर दिया है। एग्जिट पोल में वर्तमान में केंद्र में सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी की वापसी के संकेत मिल रहे हैं। नतीजे गुरुवार (23 मई) को आएंगे, लेकिन एग्जिट पोल के अनुसार, बीजेपी को प्रचंड जीत की ओर बढ़ते देख विपक्षी दलों ने एक बार फिर चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और ईवीएम पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

यह भी पढ़ें- विपक्ष के हंगामे के बीच प्रणब मुखर्जी ने की चुनाव आयोग की प्रशंसा, 2019 चुनाव को बताया ‘परफेक्ट’

इस बार नतीजे आने के पहले ही हार के बहाने ढूंढे जा रहे हैं। विपक्षी पार्टियां हार से बचने के लिए जितनी नीचे जा सकती हैं, जा रही हैं। ईवीएम की पुरानी वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है और कहा जा रहा है कि ईवीएम बदला जा रहा है। जो वीडियो शेयर की जा रही है, वो वीडियो 30 अप्रैल की है, जिसके बारे में आयोग ने संज्ञान लेते हुए पूर्व में जानकारी दे दी है

इसके अलावा दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी ट्विटर पर बिहार के सारण और यूपी के गाजीपुर और चंदौली सहित कई जिलों में मशीन बदले जानेे की अफवाह फैलाई, जिसे चुनाव आयोग ने सभी आरोपोंं को खारिज करते हुए कहा कि ईवीएम पूरी तरह से सुरक्षित है। चुनाव आयोग के अनुसार, हर काउंटिंग सेंटर पर ईवीएम और VVPAT मशीन को राजनीतिक दलों के सामने वीडियोग्राफी करके सुरक्षित रखा गया है। आयोग के मुताबिक, ईवीएम जिस जगह पर हैं, वहाँ पर सीसीटीवी कैमरे की भी पूरी व्यवस्था है।

जबकि चुनाव आयोग ने अपनी ओर से हर घटना पर अलग-अलग जवाब दिए। उत्तर प्रदेश गाजीपुर मामले में चुनाव आयोग ने बता दिया है कि स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर प्रत्याशियों द्वारा जो सवाल खड़े किए गए थे, उन्हें सुलझा लिया गया है।

इन घटनाओं पर चुनाव आयोग ने सही जानकारी देने के बाद इन सभी तरह की अफवाहों पर विराम लगाने के लिए प्रेस स्टेटमेंट भी जारी की, जिसे आप यहाँ पढ़ सकते है। आपको बता दे स्ट्रांग रूम पर सील राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के सामने लगाई जाती है, और मतगणना के दिन यह सील उन्ही के सामने तोड़ी भी जाती है।

अपनी संभावित हार को देखते हुए EVM को लेकर सबसे ज्यादा अफवाह बिहार के राजनीतिक दल उड़ा रहे है, जिसपर बिहार के चुनाव आयुक्त ने सारी खबरो को निराधार बताते हुए, प्रेस स्टेटमेंट जारी किया है।

इन सब के अलावा आज दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में 21 विपक्षी दलों की बैठक है, जिसमे 23 मई को परिणाम आने के बाद आगे किस तरह से जनादेश का अपमान करना है, इस पर चर्चा होगी। वहीं दूूूसरी तरफ एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने विपक्ष की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमे वीवीपैट की 100% पर्चियों का मिलान ईवीएम से करने की मांग की गई थी। दरअसल, विपक्षी पार्टियों को किसी भी संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करने में ज़रा भी हिचक नहीं होती। आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने चुनाव आयोग पर बेहद ही तुच्छ टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को अपना कार्यालय बीजेपी के कार्यालय में खोल लेना चाहिए। मतलब इनके अनुसार, चुनाव आयोग बीजेपी का एजेंट है।

यह भी पढ़ें- लोकसभा 2019 के चुनाव परिणाम मनमुताबिक ना आने पर विपक्ष रच रहा है यह साजिश

आपको बता दें कि 2014 के बाद आज तक विपक्षी दल जितने भी चुनाव हारे हैं, उन सब में उन्होंने ईवीएम खराब होने का दावा किया है। लेकिन इस बार इन लोगों ने नया बहाना ढूंढ लिया है। इस बार चुनाव आयोग ने साफ तौर पर ईवीएम के खराब होने के दावे को पहले ही खारिज कर दिया है, तो संविधान और लोकतंत्र के तथाकथित रक्षकों द्वारा ईवीएम बदले जाने का प्रलाप किया जा रहा है। इन्हें शायद पता नहीं कि आज की जनता सब कुछ देख रही है। दिल्ली, केरल, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में जीते तो ईवीएम ठीक थीं, लेकिन जहां हार गए, वहां ईवीएम खराब हो गई।

मालूम हो कि आयोग पहले भी बार बार ईवीएम टेंपरिंग को लेकर विपक्ष के आरोपों को सबूूत सहित नकार चुका है। चुनाव शुरू होने के पहले भी आयोग ने सभी पार्टियों को ईवीएम टेंपरिंग को लेकर सबूत देने को कहा था, लेकिन किसी ने सबूत नहीं दिया। अब जब उन्हें आभास हो गया है कि जनता एक बार फिर उन्हें नकारने वाली है, तो पहले ही हार का नया बहाना ढूंढ लिए। ये लोग जनता के दिलों में जगह बना नहीं पाते, उनके मुद्दों को ठीक से सरकार के सामने उठा नहीं पाते, सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए अनर्गल आरोप लगाते हैं, जिसे जनता के साथ साथ न्यायालय भी कई बार नकार चुका है।

Also contributed by Awantika Singh in this article.