कल हमनें आपको नोयडा के सेक्टर 58 के नमाज़ विवाद के बारे में विस्तार से बताया था। आज उसी विषय को आगे बढ़ाते हुए हम आपको बताते हैं की इस विषय को लेकर देश के तथाकथित सेक्युलर नेताओं और स्वघोषित निष्पक्ष पत्रकारों का क्या रवैया है।

सबसे पहले आप ओवैसी साहब का ट्वीट देखिये ओवैसी जी कहते हैं यूपी पुलिस कांवड़ियों पर फूल बरसाती है, लेकिन मुस्लिमों के नमाज पढ़ने पर शांति और सौहार्द बिगड़ता है।

जिस नोयडा पुलिस पर पक्षपात करने का ओवैसी साहब आरोप लगा रहे हैं। इसी नोयडा पुलिस ने सिर्फ़ पार्कों में नमाज़ ही नहीं यहाँ बिना इजाज़त पब्लिक प्लेस में भागवत कथा के लिए बनाए गए स्टेज को भी हटवाया है। जब निष्पक्ष काम हो तो दिक़्क़त कैसी? सार्वजनिक जगहों पर नमाज़ या जागरण हो ही क्यों ? जिसको करना है घर या मंदिर-मस्जिद में करे।

अब आपको NDTV का लेख पढ़ाते हैं

NDTV के सीनियर एडिटर प्रियदर्शन के अनुसार अगर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का उल्लंघन करके पार्क में बिना इजाज़त पढ़ी जा रही नमाज को रोकना ‘उद्धत बहुसंख्यकवाद’ है तो नोएडा पुलिस ने तब क्या किया था जब उसने नवरात्र पर पूरे शहर में बिना अनुमति हो रहे भगवती जागरणों के तंबू उखाड़कर फेंक दिए थे और जुर्माना भी ठोंका था? इसी नोएडा पुलिस ने कल शहर में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का प्रोग्राम नहीं होने दिया था, क्योंकि इजाज़त नहीं ली गई थी। जब पत्रकारिता समाज में नफरत फैलाने और हिंदुओं के खिलाफ दुष्प्रचार का औजार बन जाती है तो ऐसे लेख लिखे और छापे जाते हैं।

जब नोयडा पुलिस ने भागवत कथा के लिए स्टेज़ हटवाया, नवरात्र में लगे तम्बू हटवाये, जुर्माना ठोका तब कोई हंगामा नहीं हुआ लेकिन खुले में नमाज़ पढ़ने में रोक लगी तो सीधे धर्म विशेष पे हमला हो जाता है। ये कैसी मानसिकता है?

जबकि ये बात सिर्फ़ खुले में नमाज़ पढ़ने की नहीं है। मुस्लिमों ने मुम्बई एयरपोर्ट पर भी नमाज़ पढ़ी थी जबकि वहाँ पर पहले से ही नमाज़ के लिए प्रेयर रूम है। जबकि हम सब जानते हैं नमाज़ हाइवे, सड़क, ट्रेन को रोक कर रेलवे ट्रैक पर भी होती है। फिर भी इस देश में किसी की हिम्मत नहीं होती है इन जगहों पर नमाज़ पर रोक लगाने की। जबकि इस्लाम के जानकार तारिक फतह साहब का कहना है कि नमाज घर पर पढ़ी जा सकती है, जहां पर बैठे हों, वहीं पर नमाज अदा की जा सकती है. सड़क, ट्रैफिक रोककर नमाज पढ़ना या दूसरे की जमीन पर, पार्क आदि पर इजाजत के बिना नमाज अदा नहीं की जानी चाहिए।

बहरहाल NDTV के प्रियदर्शन को यह वीडियो भी सुनना चाहिए।

ख़ैर, हमारा अपना मानना है कि खुले में शौच और इबादत की छूट नहीं होनी चाहिए। दोनों से ही प्रदूषण होता है।

Leave a Reply