राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने मालेगांव बम धमाकों की आरोपी और भोपाल से भाजपा उम्‍मीदवार साध्‍वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को चुनाव लड़ने से रोकने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। अपने फैसले में अदालत ने कहा कि मौजूदा लोकसभा चुनावों में हमारे पास किसी को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए कोई कानूनी शक्तियां नहीं हैं। किसे चुनाव लड़ने देना है और किसे नहीं, यह तय करना चुनाव आयोग का काम है। विशेष जज वीएस पडालकर ने कहा कि यह याचिका सुनवाई के योग्‍य नहीं है। भाजपा उम्मीदवार ने भी अपने दलील में इस याचिका को रद्द करने की अपील की थी।

मालूम हो कि निसार बिलाल नाम के एक व्यक्ति ने एनआईए के विशेष कोर्ट से अपील की थी कि जब तक ट्रायल चल रहा है, प्रज्ञा ठाकुर को किसी ही तरह का चुनाव लड़ने से रोका जाए। निसार का बेटा सैयद अहमन मालेगांव बम धमाके में मारा गया था। इसके बाद एनआईए ने कोर्ट में जवाब दाखिल कर कहा है कि 2006 में एजेंसी ने जो सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी, उसमें प्रज्ञा के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने होने की बात क़ुबूल की गई है। एनआईए ने अपने चार पेज के जवाब में एनआईए जज से कहा कि प्रज्ञा एवं अन्य चार आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिल पाए हैं।

निसार बिलाल के द्वारा दाखिल की गई इस याचिका पर विशेष कोर्ट ने प्रज्ञा ठाकुर से जवाब मांगा था। अपने जवाब में प्रज्ञा ने कहा कि यह याचिक राजनीति से प्रेरित है। लोकप्रियता हासिल करने के लिए ऐसा किया गया है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट का समय बर्बाद किया है। इस याचिका को रद्द कर याचिकाकर्ता के खिलाफ जुर्माना लगाया जाए। जिसके बाद अदालत ने बुधवार को अपने फैसले में याचिका को रद्द करते हुए भाजपा उम्मीदवार को बड़ी राहत दी।

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