भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन को अब राज्यसभा में भी बड़ी बढ़त मिली है। तेलुगू देशम पार्टी के चार और इंडियन नेशनल लोकदल के एक सांसद का भाजपा में शामिल होने के बाद एनडीए का दबदबा यहां भी बढ़ गया है। राज्यसभा में अभी तक मोदी सरकार को विधेयक पास कराने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यहां तक की कई विधेयक बहुमत नहीं होने के कारण सरकार पास नहीं करा पाई। लेकिन यहां भी अब स्थिति बदलने वाली है।

235 सदस्यों में से राज्यसभा में रविवार तक एनडीए के 111 सदस्य हो गए हैं। अभी 10 सीटें खाली हैं। जिनमें से 4 सांसद 5 जुलाई तक एनडीए के चुनकर आने की संभावना है। इसके साथ ही यह आंकड़ा 115 हो जाएगा। कुल 241 सदस्यों की संख्या में 115 सांसदों का आंकड़े का अर्थ है कि एनडीए के पास बहुमत से महज 6 सांसद कम रहेंगे। यदि राज्यसभा में कुल 245 सांसद हो जाते हैं तो फिर एनडीए को अपने दम पर 123 सांसदों की जरूरत होगी।

हालांकि वर्तमान राज्यसभा में अगर सरकार को गैर-यूपीए दल जैसे टीआरएस, बीजेडी और वाईएसआरसीपी का साथ मिलता है तो उसके लिए किसी भी बिल को पास कराना कठिन नहीं होगा।

राज्यसभा की 6 सीटों पर 5 जुलाई को चुनाव होना है। इनमें से एक पर भाजपा की सहयोगी लोजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान निर्विरोध चुने जा चुके हैं। इसके अलावा गुजरात की दो सीटें भाजपा के खाते में जाती दिख रही हैं। केंद्रीय मंत्री अमित शाह और स्मृति ईरानी के राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद यह सीटें खाली हुई हैं। ओडिशा में भी तीन सीटों पर चुनाव हो रहे हैं इनमें से एक भाजपा के हिस्से में जा सकती है।