बिहार के किशनगंज जिला में ईद के दिन नमाज पढ़ने को लेकर मुस्लिम समुदाय और स्थानीय आदिवासियों के बीच मुठभेड़ हो गयी जिसमे 3 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार किशनगंज जिले के ठाकुरगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत धुलाबाड़ी चाय का बागान है। यहाँ आदिवासियों की जमीन पर नमाज पढ़ने के बहाने से मुस्लिम समुदाय जबरदस्ती कब्जा करने की कोशिश कर रहा था। स्थानीय आदिवासियों के अनुसार ठाकुरगंज क्षेत्र के अधिकतर जमीन पर मुसलमानो ने कब्ज़ा किया हुआ है और अगर उन्हें ढील दे दी जाती तो वो आदिवासियों की जमीन नमाज अदायगी के बहाने से हड़प लेते।

आपको बता दे कि किशनगंज जिले में मुसलमानो की जनसँख्या 70% के ऊपर जा पहुँची है और इस क्षेत्र में ओवैसी की पार्टी AIMIM बीते कुछ समय में काफी सक्रिय है। यहाँ हिन्दू अल्पसंख्यक है और उनकी स्थिति मुस्लिम उन्मादियों के आतंक की वजह से दिनों दिन बदतर होती जा रही है।

ईद के मौके पर आदिवासियों की जमीन पर मुस्लिम एक साथ इकठ्ठा होकर नमाज पढ़ने आये थे। आदिवासियों ने जब उन्हें अपनी जमीन देने से इंकार किया तो मुसलमानो ने अपना संख्या बल दिखाकर उन्हें डराने धमकाने की कोशिश की और जबरदस्ती वहाँ बैठ गए। आदिवासी समुदाय ने अपनी जमीन को कब्जे से बचाने के लिए इनसे लड़ने का मन बनाया और तीर धनुष लेकर मुसलमानो के साथ लड़ाई पर उतर आये। इस लड़ाई में आदिवासियों ने कुछ लोगो को घायल कर दिया जिन्हे बाद में अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

आदिवासियों ने इस संघर्ष में अपनी ज़मीन बचा ली लेकिन इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और भारी मात्रा में पुलिस तैनात कर दी गयी है। इस घटना को अलग अलग मिडिया वाले तोड़ मरोड़ कर पेश कर रहे हैं जिसमे आदिवासियों को उन्मादी और हिंसक बताया गया है। जबकि सच्चाई कुछ और है, गरीब आदिवासी अपनी रोजी रोटी को हमेशा की तरह लूटने से बस किसी तरह बचाना चाहते थे।

सुबह से चालू हुआ ये संघर्ष दोपहर तक चलता रहा जिसके बाद स्थानीय नेता और पुलिस प्रशासन के हस्तक्षेप से रोकथाम लगाई गयी। फिलहाल चाय बागान और आसपास की जमीन से कब्जा हटा दिया गया है और प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया है कि इस मामले का निपटारा जल्द से जल्द किया जायेगा।