केरल के प्रसिद्ध मंदिर सबरीमाला मंदिर के द्वार खुले हुए तीन दिन हो गए हैं लेकिन भगवान अयप्पा के श्रद्धालुओं का विरोध अब भी जारी है। श्रद्धालु सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का विरोध कर रहे हैं जिसमें मंदिर में महिलाओं की एंट्री से बैन हटा दिया गया है। शुक्रवार को दो महिलाएं मंदिर में प्रवेश करने से तब चूक गईं, जब प्रदर्शनकारियों ने उन्हें 500 मीटर दूर रोक दिया। दोनों महिलाओं को 150 जवानों की सुरक्षा और आईजी के नेतृत्व में हेलमेट पहनाकर मंदिर ले जाया जा रहा था, लेकिन तेज विरोध के चलते उन्हें लौटना पड़ा। आपको जानकर हैरानी होगी इनमें से एक महिला कोच्चि की रहने वाली सामाजिक कार्यकर्ता रेहाना फातिमा हैं और दूसरी महिला हैदराबाद की पत्रकार कविता जक्कल है।

मुम्बई की हाजीअली दरगाह समेत देश की किसी मस्जिद में मुस्लिम महिलाओं को प्रवेश की इजाजत नही हैं, लेकिन रेहाना फातिमा उसके लिए प्रयास नही कर रही हैं। उन्हें हिन्दुओ के मन्दिर में घुसना हैं। यह हरकत उनके साम्प्रदायिक मनोभावों को पुष्ट करता हैं।

जिस बात की हिन्दुओ को आशंका थी, सबरीमाला में महिलाओ का प्रवेश आस्था और भक्ति का विषय ना होकर एक्टिविज्म का हैं, हिन्दू परम्पराओ को नीचा दिखाने का हैं, बिल्कुल वही हो रहा हैं। इस कार्य मे केरल की सरकार पूरी तरह से मदद कर रही हैं, वरना आप खुद सोचिए कि गैर-हिन्दू महिलाओ को इतनी पुलिस सुरक्षा में मन्दिर तक ले जाने की क्या आवश्यकता थी? बहरहाल उधर सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी कंडारू राजीवारू ने कहा कि अगर महिलाएं जबर्दस्ती प्रवेश करने की कोशिश करेंगी तो हम मंदिर को ताला लगाकर चाबी सौंप देंगे। हम श्रद्धालुओं के साथ हैं। हमारे पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। मंदिर परिसर में मीडिया से बात करते हुए मुख्य पुजारी कांतारारू राजीवरू ने कहा, “हम महिलाओं का बहुत सम्मान करते हैं। इसके अलावा दूसरी तरह की पूजा के लिए आने पर उनका बेहद सम्मान किया जाता है।”

उन्होंने कहा, “हमने हमेशा कानून का सम्मान किया है, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद हम महिलाओं से विनम्रता से आग्रह करते हैं कि उन्हें इस पवित्र मंदिर की परंपरा को तोड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।”

मीडिया समाचारों के मुताबिक, रेहाना फातिमा के सबरीमाला मंदिर के करीब पहुंचने से गुस्साए कुछ लोगों ने काेच्चि में उनके घर में तोड़फोड़ कर दी। उनके घर के शीशे तोड़ दिए गए और सामान निकालकर बाहर फेंक दिया गया।

महिला एक्टिविस्ट के मन्दिर में प्रवेश के मुद्दे पर राज्य देवसम (धार्मिक ट्रस्ट) के मंत्री कडकमपल्ली सुरेंद्रन ने बताया, “कई लोग मंदिर में प्रवेश करना चाह रहे थे, जिनमें कुछ कार्यकर्ता भी थे। भीड़ में कौन क्या है, सरकार के लिए यह पता लगाना नामुमकिन है। लेकिन हमें पता है कि उस वक्त दो सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थीं, जिनमें से एक पत्रकार बताई जा रही हैं।