पाकिस्तान में सिंध प्रांत के एक मौलवी ने सार्वजनिक रूप से इस बात को कबूल किया कि वह हिंदू लड़कियों को मुस्लिम बनाने के मिशन पर था, है और आगे भी रहेगा। हिंदी अखबार दैनिक भास्कर ने सिंध प्रांत में हिंदुओं के लिए खलनायक बने इसी मौलवी अब्दुल खालिक मीथा से बातचीत की। बातचीत में मीथा ने कहा कि ‘मैं दावे के साथ कह रहा हूं कि मेरे 9 बच्चे भी भविष्य में यही काम करेंगे। मेरे पुरखों ने भी यहीं काम किया था।’

78 साल का मीथा दशकों से धर्मांतरण करा रहा है। सियासी पैठ होने की वजह से वह प्रधानमंत्री इमरान खान का करीबी बन गया। नौ बच्चों का पिता है। उसकी पत्नी गुजर चुकी है। अब वह एक और शादी करना चाहता है। कहता है- ‘मेरे फॉलोअर्स चाहते हैं कि मैं एक निकाह और करूं। इसलिए अपने लिए दुल्हन भी खोज रहा हूं। मेरी नई बेगम हिंदुस्तान से हो, ऐसी मेरी ख्वाहिश है।’

खास बात है कि मौलवी का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अपने पहले अमेरिकी दौरे पहुंचे हैं। इस दौरान करीब दस अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रंप को पत्र को लिखकर कहा कि सिंध प्रांत में हिंदू लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्मांतरण के मुद्दे पर ट्रंप, पीएम इमरान से सीधे बात करें।

पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग की हालिया रिपोर्ट से भी मीथा के दावे में सच्चाई नजर आती है। रिपोर्ट कहती है कि साल 2018 में अकेले सिंध प्रांत में ही अल्पसंख्यकों के धर्मांतरण के एक हजार से ज्यादा मामले सामने आए। रिपोर्ट में दावा किया गया कि धर्मांतरण का सबसे बड़ा अड्डा भरचूंदी दरगाह भी सिंध प्रांत में है, जिसे इमरान खान का करीबी मीथा ही चलाता है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं के मुताबिक एक साल के भीतर भरचूंदी दरगाह में रिकॉर्ड 450 हिंदू लड़कियों का धर्मांतरण कराया गया।

सालभर में हजार से ज्यादा हिंदू लड़कियों के धर्मांतरण के खिलाफ सड़कों पर लोग
सिंध प्रांत में लोग जबरन धर्मांतरण के खिलाफ सड़कों पर उतर रहेे हैं। पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों का धर्मांतरण उतना ही पुराना है, जितनी यहां की मुस्लिम आबादी। 11-15 साल की हिंदू लड़कियां इसकी सबसे ज्यादा शिकार हो रही हैं। हाल में दो लड़कियों के अपहरण के बाद से मुद्दा फिर गरम है।