कन्नौज : उत्तर प्रदेश में दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, यहाँ एक माँ ने अपने आठ महीने के बच्चे को गला घोंट कर मार डाला। बच्चे को जन्म देने वाली माँ, बच्चे की सलामती की दुआ करने वाली माँ ने खुद अपने ही हाथों अपने बच्चे का गला दबा दिया। 

घटना कन्नौज जिले के छिबराऊमल क़स्बे के बरेलिया मुहल्ले की है। रूखसार (माँ) के तीन बच्चे हैं। पति शाहिद मुम्बई में नौकरी करता है और कुछ महीने पहले रूखसार और शाहिद के बीच में किसी बात को लेकर हुए झगड़े के चलते शाहिद ने पिछले पाँच महीने से घर कोई पैसा नहीं भेजा और न ही किसी की सुध ली। 

गहन आर्थिक तंगी से जूझ रही रूखसार के लिए घर का खर्च उठाना असंभव जैसा काम था, लेकिन किसी तरह से वह कुछ जमा किए रूपयों से अपना और अपने तीन बच्चों का गुजर-बसर कर रही थी। इसी दौरान उसके छोटे बेटे अहद को खून का संक्रमण हो गया तो रूखसार ने अपना बचा हुआ सोना और घर की कुछ चीज़ें बेचकर आगरा में उसका इलाज करवाया। 

गुरुवार शाम बुखार से तपते बेटे को लेकर रुखसार डॉक्टर के पास पहुंची, लेकिन उधार चुकाए बिना वह दवा देने को तैयार नहीं हुए। तीन दिन की भूख और तेज़ बुखार के कारण बच्चा चीख चीख कर रोए जा रहा था। रूखसार के लिए यह बर्दाश्त करना बहुत मुश्किल हो गया था। जब बच्चे की भूख और चीख़ें रूखसार के लिए बर्दाश्त से बाहर गयी तो उसने सुबह छ: बजे अहद को पानी में चीनी घोलकर पिलाई और वो सो गया।

सुबह आठ बजे तक जब वो नहीं उठा तो घर में बच्चों और क़रीब रहने वालों को शक हुआ। रूखसार की चार साल की बेटी अनस ने पुलिस को बताया कि उसकी माँ सुबह ग़ुस्से में थी और उसने अहद को गला दबाकर मार दिया। पुलिस पूछताछ में रुखसार ने बताया कि वह तीन दिन से बच्चे के लिए दूध का इंतजाम भी नहीं कर पा रही थी, इसलिए गला दबाकर मार डाला। रूखसार को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

जो हुआ वो दिल दहला देने वाला है पर समाज को भी कुछ बातों पर सोचने की आवश्यकता है। यहाँ यह भी गौर करने वाली बात है कि अगर 3 साल में तीन बच्चे होंगे तो इसका सीधा असर माँ की मानसिक और शारीरिक सेहत पर भी पड़ेगा। डाक्टर भी दो बच्चों के बीच कम से कम तीन साल का अंतर रखने की सलाह देते है। बहरहाल जब जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की बात आती है तो सबसे ज्यादा विरोध विशेष समुदाय के नेताओ की तरफ से आती है। अब ऐसी घटनाओं के बाद उन्हें भी जनसँख्या नियंत्रण कानून पर सोचना होगा। यहाँ यह भी याद रखे कि अगर इस तरह से हर साल बच्चे पैदा होंगे तो भारत सरकार क्या दुनिया की कोई सरकार ऐसे लोगो की मदद नही कर सकती।