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पीएम मोदी के खिलाफ 700 कलाकारों के बाद, अब 907 कलाकारों ने उन्हें दुबारा प्रधानमंत्री बनाने के लिए जनता से की अपील

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वर्ष 2019 के आम चुनाव का एक दूसरे से मुकाबला करने के लिए राजनीतिक पार्टियों ने अपनी अपनी कमर कस ली है। कल यानी 11 अप्रैल को पहले चरण का मतदान है और नियमानुसार चुनाव के 48 घंटे पहले यानी 9 अप्रैल को शाम 5 बजे से 11 अप्रैल को होने चुनाव होने वाले क्षेत्रों में चुनाव प्रचार थम गया। इस लोकसभा चुनाव में अपरोक्ष रूप से तथाकथित बुध्दिजीवी भी हिस्सा ले रहे हैं और एक पार्टी विशेष के खिलाफ वोट देने का अभियान चला रहे हैं। इस अभियान में अरुंधति रॉय, अमिताव घोष, जैसे इतिहासकार और नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, अनुराग कश्यप, गिरीश कर्नाड, जैसे अंग्रेजी, तमिल, तेलुगु, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, आदि कई भाषा के फिल्मकार शामिल हैं।
कुछ कलाकारों की बातों ध्यान से सुनें तो ऐसा लगता है जैसे हमारा देश भारत, देश न हो कर दीवार पर लटका हुआ एक दर्पण है। जरा सी हवा उसके प्रतिकूल चली नहीं कि गिर कर टूट जायेगा। वही हाल इन कलाकारों का भी है। जब से इनकी नापसंद पार्टी की सरकार बनी है, इन्हें कुछ न कुछ कष्ट लगा ही रहता है। वेबसाइट ‘आर्टिस्ट इंडिया डॉट कॉम’ पर इन फिल्मकारों ने एक वक्तव्य जारी किया है, जिसमे कहा गया है कि फिल्म इंडस्ट्री सदैव से विभाजनकारी शक्तियों, जाति, धर्म, संप्रदाय के आधार पर बांटने वालों के खिलाफ खड़ा रहा है। इसमे आगे कहा गया है कि आज के समय में भारत की विविधता खतरे में है। गीतकार, नृत्यांगनाएं, हंसाने वाले कलाकर, हमारा संविधान आदि सब कुछ खतरे में है।
ऐसे लगभग 700 कलाकारों ने देशवासियों के नाम एक अपील की है और खुला पत्र लिखा है कि सभी लोग भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ अपने मताधिकार का प्रयोग करें। इसके लिए इन्होंने मुस्लिम और दलित कार्ड खेलते हुए तर्क दिए हैं कि बीजेपी की सरकार के समय मुस्लिमों और दलितों पर अत्याचार हो रहे हैं, उनकी आवाजों को दबाया जा रहा है, आदि। लेकिन ये सभी प्रकृति का एक सबक भूल गए कि कोई भी एकतरफा चीज़ अधिक दिनों तक टिकी नहीं रहती।उसको संतुलित करने के लिए दूसरी शक्तियां आती ही आती हैं। इसी क्रम में नहले पे दहला लगाते हुए भारत के  907 दिग्गज कलाकार सामने आये हैं, जिन्होंने जनता से मोदी सरकार को फिर से सत्ता में लाने की वकालत की है। इसमें कुछ मुख्य नाम हैं- पंडित जसराज, उस्ताद वसिफ़ुद्दीन डागर, शंकर महादेवन, अनुराधा पौडवाल , हंसराज हंस , विवेक ओबेरॉय, उस्ताद गुलाम मुस्तफ़ा खान, राजा और राधा रेड्डी, पंडित विश्वमोहन भट्ट, अब्दुल गफ्फ़ार खत्री, मालिनी अवस्थी, पल्लवी जोशी और राहुल राय। इन प्रख्यात कलाकारों का कहना है कि पीएम मोदी वर्तमान समय की जरूरत हैं।  ‘नेशन फर्स्ट कलेक्टिव’ के बैनर तले यह बयान जारी किया गया है।
इन कलाकारों ने हस्ताक्षर के साथ जनता से यह अपील भी की, जिसमे कहा है- “हम रचनात्नक कलाकार और साहित्य क्षेत्र से जुड़े लोग अपने सभी साथी नागरिकों से बिना किसी दबाव और पक्षपात के नई सरकार चुनने के अपने अधिकार का प्रयोग करने की अपील करते हैं।”
उन्होंने कहा कि बीते पांच वर्षो के दौरान भारत ने एक ऐसी सरकार देखी है, जिसने भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन और विकासोन्मुख प्रशासन दिया है। उन्होंने कहा, “इस अवधि के दौरान भारत ने वैश्विक रूप से अधिक सम्मान हासिल किया है। यह हमारी दृढ़ धारणा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का बने रहना इस वक्त की जरूरत है।” इन कलाकारों के समूह ने कहा कि जब हमारे सामने आतंकवाद जैसी चुनौती है तो हमें एक ‘मजबूत सरकार’ की जरूरत है न कि ‘मजबूर सरकार’ की।और इसलिए मौजूदा सरकार की फिर से जरूरत है।
इतने भारी संख्या में इन कलाकारों का सामने आना यह सिद्ध करता है कि देश में एक मजबूत और जीवंत प्रजातंत्र साँसे ले रहा है और देश में अभिवयक्ति की आज़ादी को कोई खतरा नहीं हैं। खतरा है तो एकतरफा अभिव्यक्ति की आज़ादी को, जिस पर वामपंथी विचारधारा का अधिकार रहा है। अब सिर्फ इस एकाधिकार पर खतरा है। सोशल मीडिया के उत्थान की वजह से अब वह वर्ग भी मुखर हो चुका है, जिसकी आवाज़ कभी कभी ही सुनाई देती थी।

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