27 जुलाई को केंद्र सरकार ने कश्मीर के हित में एक बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए, वहां अर्द्धसैनिक बलों की 100 कंपनियों को भेजने का फैसला लिया। सरकार के इस फैसले के बाद लोगों ने ये कयास लगाने शुरू कर दिए हैं कि मोदी सरकार अनुच्छेद 35ए को खत्म करने की तरफ बढ़ रही है। इसके बाद से ही कश्मीर के ठेकेदारों के पेट में दर्द शुरू हो गया है। 10 हजार अतिरिक्त सुरक्षाबल भेजने का विरोध उमर अब्दुल्ला, हुर्रियत और महबूबा मुफ्ती ने किया।

अब महबूबा मुफ्ती ने फिर से इसका विरोध करते हुए देशविरोधी बयान दिया है। उन्होंने आज श्रीनगर में एक रैली को संबोधित करते हुए उपर्युक्त फैसले के विरोध में केंद्र सरकार पर निशाना साधा। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “35ए के साथ छेड़छाड़ करना बारूद को हाथ लगाने के बराबर होगा। जो हाथ 35ए से छेड़छाड़ करने के लिए उठेंगे, वो हाथ ही नहीं, वो सारा जिस्म जलकर राख हो जाएगा।”

ज्ञात हो कि महबूबा मुफ्ती बीजेपी के समर्थन से मुख्यमंत्री रहते हुए भी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में देशविरोधी बयान दे चुकी हैं। इसके अलावा भी उनके देशविरोधी बयानों की लिस्ट काफी लंबी है। अफसोस इस बात का है कि जब दिल्ली में उन्होंने ‘तिरंगे को कंधा देने वाला कोई नहीं होगा’ जैसा बयान दिया, तब भी उनके खिलाफ कोई कारवाई नहीं हुई।