उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सोशल मीडिया पर ‘आपत्तिजनक टिप्पणी’ करने के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने द वायर के पूर्व पत्रकार को गिरफ़्तार किया है। गिरफ़्तार किए गए पत्रकार का नाम प्रशांत कनौजिया है और उसे शनिवार को उसके दिल्ली स्थित घर से गिरफ़्तार करके लखनऊ ले जाया गया।

प्राप्त समाचारों के मुताबिक, प्रशांत ने ट्विटर पर एक वीडियो अपलोड किया था जिसमें एक महिला ख़ुद को योगी आदित्यनाथ की प्रेमिका बता रही थी। वीडियो के साथ आपत्तिजनक टिप्पणी लिखते हुए उसने लिखा कि ‘इश्क छुपता नही छुपाने से योगी जी।’ यही नही इससे ज्यादा आपत्तिजनक टिप्पणी उसने अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर की थी।

प्रशांत के खिलाफ लखनऊ के हज़रतगंज थाने में विकास नाम के व्यक्ति ने एफ़आईआर दर्ज करवाई थी।एफ़आईआर की प्रति में लिखा है कि प्रशांत कनौजिया ने योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ ‘आपत्तिजनक टिप्पणी’ करके उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की है। प्रशांत कनौजिया पर आईटी एक्ट की धारा 66 और मानहानि की धारा (आईपीसी 500) लगाई गई है।

आपको बता दे, प्रशांत कनौजिया सोशल मीडिया के माध्यम से जातीय और धार्मिक वैमनस्य सम्बंधित ट्वीट कर लोगो को भड़काने का काम भी करता है। इसके पहले उसने हिन्दू सन्तो और देवी देवताओं पर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां की है। खुद को पत्रकार बताने वाला प्रशांत कनौजिया की ट्विटर और फेसबुक प्रोफाइल देखने पर पता चलता है कि यह पत्रकारिता की आड़ में हिन्दुओ के खिलाफ नफरत की मुहिम चला रहा है।

(इन ट्वीटस के जरिये आप साफ समझ सकते है कि प्रशांत कनौजिया पत्रकारिता की आड़ में अपना नफरत भरा एजेंडा चला रहा था।)

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ तो ये शख्स लगातार सोशल मीडिया पर फर्जी खबरे फैलाकर उनका चरित्र हनन कर रहा था। इसके पहले इसने अफवाह फैलाई थी कि योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव को भैस चराने वाला बोला, यहां तक कि सड़कछाप गुंडा बोला था। क्या यह एक पत्रकार की भाषा है?

 

यही नही, प्रशांत कनौजिया ने जिस पत्रकारिता संस्थान से डिग्री ली है, वहाँ की एक महिला शिक्षिका पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। जिसकी वजह से इसे वहां से निलंबित किया गया था वह खबर आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते है।

विडम्बना देखिये की सोशल मीडिया पर खुद को निष्पक्षता का सर्टिफिकेट देने वाले खान मार्केट गैंग के पत्रकार कह रहे है कि वह प्रशांत से सहमति नही रखते लेकिन उसको गिरफ्तार नही करना चाहिए था। आप स्वयं सोचिये अगर जातीय नफरत फैलाने वालों लोगो को ऐसे समाज मे छुट्टा छोड़ दिया जाएगा तो यह सामाजिक तानेबाने में आग लगा देंगे।

एक पत्रकार बहुत ही जिम्मेदार व्यक्ति होता है उसे बहुत सोच समझ के खबर प्रसारित करना चाहिये, क्योकि जनता पत्रकारों पर भरोसा करती है ऐसे में अगर वह जातीय वैमनस्य फैलाने वाली फर्जी खबरे फैलायेंगे, किसी के सम्मान के खिलाफ बिना जांच पड़ताल के फर्जी खबरे प्रसारित करेगे तो उन्हें भी कठोर सजा मिलनी चाहिए, पत्रकार होने का यह मतलब नही है कि कोई कानून से ऊपर हो गया है। किसी के चरित्र पर अनायास उंगली उठाना ना तो अभिव्यक्ति की आजादी है और ना ही पत्रकारिता। पत्रकार होने का मतलब ये नही होता की कुछ भी लिख दो, हर एक लिए एक लक्ष्मण रेखा होती है।

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  1. […] आदित्यनाथ के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट साझा करने को लेकर मामला दर्ज किया गया था। […]

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