गोवा में राजनीति का सबसे शर्मसार कर देना वाला चेहरा दुनिया के सामने आया है। शनिवार (16 मार्च) की शाम कुछ शरारती तत्वों ने गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर की मृत्यु की अफवाह फैला दी। जिसके बाद शाम को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस गोवा की राज्यपाल मृदुला सिंह के पास सरकार बनाने का दावा लेकर पहुंची थी। कांग्रेस ने अपने पत्र में बीजेपी विधायक फ्रांसिस डिसूजा की मौत का हवाला देते हुए कहा कि पहले से ही अल्पमत में चल रही सरकार का समर्थन और कम हो गया है।

कांग्रेस ने सरकार बनाने का दावा पेश करते हुए कहा, “चूँकि मनोहर पर्रिकर के ना होने पर सदन में बीजेपी विधायक कम हो गए है, इसलिए अब हमें सरकार बनाने का मौका दिया जाए।” पार्टी का कहना था कि 14 विधायकों के साथ वह सबसे बड़ी पार्टी है। कांग्रेस ने ‘लोगों का भरोसा खो देने’ का हवाला देते हुए बीजेपी सरकार को भंग करने की मांग की।

राजनीति के इस क्रूर उदाहरण ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। साथ में यह भी सवाल उठ खड़ा हो गया है कि जब ऐसे संवेदनहीन लोग सत्ता में आयेंगे तो जनता का क्या होगा? राजनीतिक मूल्यों को तो परे करिये सत्ता के लिए किसी की मौत की दुआ मांगना यह इंसानी मूल्यों पर सवाल उठाता है। इसके लिए अकेले कांग्रेस को दोषी ठहराना भी सही नही है, देखा जाए तो सभी राजनीतिक दल धीरे धीरे संवेदनहीन होते जा रहे हैं।

बीजेपी के पास कुल 21 विधायकों का समर्थन
बहरहाल, गोवा में विधानसभा की कुल 40 सीटें हैं। बीजेपी विधायक फ्रांसिस डिसूजा के निधन, कांग्रेस सुभाष शिरोडकर और दयानंद सोप्ते के इस्तीफा देने के चलते सूबे में अब 37 एमएलए ही बचे हैं। सोप्ते और शिरोडकर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। इसके चलते कांग्रेस पर अब 16 की बजाय 14 विधायक ही बचे हैं, जबकि बीजेपी के पास 13 विधायक हैं। लेकिन, बीजेपी को गोवा फॉरवर्ड पार्टी के तीन, महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के तीन और एनसीपी के एक विधायक के अलावा एक निर्दलीय का भी समर्थन हासिल है। इस तरह बीजेपी के पास कुल 21 विधायकों का समर्थन है।

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