मोदी सरकार की शुरू की गई ‘मेक इन इंडिया’ (Make In India) योजना का डंका सारे विश्व मे सफल हो रही है। अभी हाल ही में भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में भी मेक इन इंडिया योजना में निर्मित ट्रेन चलना शुरू हुई है। पुलथिसी एक्सप्रेस का श्रीलंका के कोलंबो फोर्ट रेलवे स्टेशन से परिचालन शुरू किया गया। इस ट्रेन का रैक चेन्नई में इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में निर्मित किया गया था।

बता दें कि आईसीएफ छह DEMU रेक का निर्माण करेगा जिसमें पांच डिब्बों में 78 कोच होंगे। इस आदेश को भारत-श्रीलंका आर्थिक सहयोग समझौते के तहत RITES और ICF द्वारा संयुक्त रूप से निर्माण किया जा रहा है।

भारत निर्मित मेट्रो ट्रेन कोच की विदेशों में है भारी मांग

हाल के वर्षों भारत में निर्मित ट्रेनों और मेट्रो कोचों की विदेशों में लगातार डिमांड बढ़ रही है। जो कि निश्चित तौर पर मेक इन इंडिया से ही संभव हो पा रहा है। इसका ताजा उदाहरण भारत में बनी एडवांस ट्रेन का ऑस्ट्रेलिया में दौड़ना है। अब तक हम विदेशों से इंपोर्ट कर रहे थे, लेकिन अब हम विदेशों में एक्सपोर्ट कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में भारत में बनी अत्याधुनिक मेट्रो ट्रेन दौड़ रही हैं।

गौरतलब है कि सिडनी में पहली बार ड्राइवर लेस मेट्रो लाइन खुली है। इसमें 06 कोच वाली 22 एल्सटॉम ट्रेनों के द्वारा सेवा दी जा रही है। ये मेट्रो नार्थ वेस्ट रेल लिंक में तल्लावांग स्टेशन से चैट्सवुड स्टेशन के बीच कुल 13 स्टेशनों के बीच चल रही हैं।

बता दें, सिडनी मेट्रो के लिए यह सभी 22 ट्रेनें भारतीय कंपनी एल्सटॉम एसए ने उपलब्ध कराई थीं। इन ट्रेनों को आंध्र प्रदेश के श्री सिटी में असेंबल किया गया। ये ट्रेनें पूरी तरह से स्वचालित हैं और इसमें एलईडी लाइट आपातकालीन इंटरकॉम, सीसीटीवी कैमरे जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

ट्रेन 18 (वंदे भारत एक्सप्रेस) की विदेशों में बढ़ी मांग

मेक इन इंडिया के तहत निर्मित अत्याधुनिक ट्रेन-18 जिसे वंदे भारत एक्सप्रेस नाम से जाना जाता है। यह भी विदेशों में काफी लोकप्रिय हो रही है। बताया जा रहा है कि दुनिया के कई देश इसे खरीदना चाहते हैं। ज्ञात हो कि कुछ सप्ताह पहले ही इस ट्रेन का 60 हजारवां कोच देश को समर्पित किया गया है।

गौरतलब है कि, पीएम मोदी ने ही मेक इन इंडिया के तहत निर्मित वंदे भारत एक्सप्रेस को फरवरी में हरी झंडी दिखाई थी। इस ट्रेन को पहले ट्रेन 18 के नाम से जाना जाता था। यह ट्रेन नई दिल्ली स्टेशन से वाराणसी के लिए चलती है। रेलवे बोर्ड के सदस्य राजेश अग्रवाल का कहना है कि कुछ दक्षिण पूर्व एशियाई और दक्षिण अमेरिकी देशों से  ‘ट्रेन 18’ के डिब्बों की मांग आई है।

इन ट्रेनों की विदेशों में मांग भारत की उभरती टेक्नोलॉजी और उस पर वैश्विक भरोसे को व्यक्त करती है तो गलत न होगा। चीन और अमेरिका के बीच चल रहे ट्रेड वॉर के कारण विदेशी कंपनियां भारत में निवेश करना बेहतर समझ रही हैं। इसलिए न केवल ट्रेन कोच बल्कि स्मार्टफोन निर्माण करने वाली कई कंपनियां भी बड़े पैमाने पर मेक इन इंडिया के तहत भारत में ही अपने उत्पादों का निर्माण कर रही हैं।

ट्रेन कोच निर्माण में रिकार्ड उत्पादन

मेक इन इंडिया कैंपेन की सफलता का ही परिणाम है कि इंडियन रेलवे की इंडियन कोच फैक्ट्री (आईसीएफ), माडर्न कोच फैक्ट्री (एमसीएफ) और रेल कोच फैक्ट्री (आरसीएफ) ने फाइनेंसियल ईयर 2018-19 में रिकार्ड कोच बनाए। इस वित्त वर्ष में 6037 कोच बनाए गए। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 35 फीसदी ज्यादा रहा।

ज्ञात हो, चीन सालाना तौर पर 2600 कोच बनाता है। जबकि भारत ने इस साल उससे अधिक कोच बनाए। उत्तर प्रदेश के रायबरेली स्थित रेल कोच फैक्ट्री ने वित्त वर्ष 2018-19 में रिकार्ड 1425 कोच बनाए, जो लक्ष्य से कहीं ज्यादा थे। साल 2017-18 में 710 कोच बनाने का टारगेट दिया गया था, जिसके मुकाबले में 711 कोच बनाए गए। वहीं 2016-17 में 1422 टारगेट पर 1425 कोच बनाए गए।

आपको जानकर हैरानी होगी कि, चीन सालाना तौर पर 2600 कोच बनाता है। जबकि भारत ने इस साल उससे अधिक कोच बनाए। उत्तर प्रदेश के रायबरेली स्थित रेल कोच फैक्ट्री ने वित्त वर्ष 2018-19 में रिकार्ड 1425 कोच बनाए, जो लक्ष्य से कहीं ज्यादा थे। साल 2017-18 में 710 कोच बनाने का टारगेट दिया गया था, जिसके मुकाबले में 711 कोच बनाए गए। वहीं 2016-17 में 1422 टारगेट पर 1425 कोच बनाए गए।

इस वित्त वर्ष एमसीएफ ने नए टाइप के कोच बनाए, जिसमें एसी पैंट्री, कार अंडर स्लंग पावर कार, नॉन एयर कंडीशन चेयर कार, रिसर्च डिजाइन एडं स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन के लिए ट्रैक रिकार्डिंग कार शामिल थे। इस साल के शुरुआत में रिपोर्ट किया गया था कि जनवरी 2019 में सबसे ज्यादा 152 एलएमबी कोच बनाए गए, जो कि अब तक का सबसे ज्यादा आंकड़ा है।

भारत में बने रक्षा उपकरणों की भी बड़ी मांग

यह सब मेक इन इंडिया का ही कमाल है कि आज न केवल ट्रेन कोच, मोबाइल बल्कि रक्षा उपकरणों का भी बड़े पैमाने पर निर्माण किया जा रहा है। आज भारत अपने रक्षा उपकरणों के लिए दक्षिण पूर्व एशियाई और खाड़ी देशों में निर्यात कर रहा है। कई देश भारत से संबंध स्थापित कर रक्षा उत्पादों को खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। भारत की मिसाइलों को कई देश अपने हथियारों के जखीरे में शामिल करना चाहते हैं।