महाराष्ट्र के औरंगाबाद के एक होटल में काम करने वाले इमरान इस्माइल ने शुक्रवार को 10 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें उसने कहा था कि गुरुवार की देर रात जब वो घर जा रहा था तो रास्ते में कुछ लोगों ने उसे रोका और जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर किया। विरोध करने पर उन लोगों ने इमरान की पिटाई की और जबरदस्ती जय श्री राम बुलवाया।

इमरान के मुताबिक शुक्रवार तड़के जब वह मदीना होटल से अपना काम खत्म करके वापस लौट रहा था, तभी करीब 10 बदमाशों ने हुडको कॉर्नर के पास उनकी बाइक रोक कर चाबी छीन ली और उनसे जय श्रीराम बोलने को कहा। मना करने पर वह लोग उसे पीटने लगे। इमरान ने पुलिस को बताया कि गणेश नाम के एक व्यक्ति और उसके परिवार ने हंगामे की आवाज सुन उसको बचा लिया।

जिस गणेश और उसके परिवार का नाम इमरान ने अपने बचावकर्ता के रूप में लिया था, उसी चश्मदीद गवाह गणेश ने पुलिस को बताया है कि इमरान झूठ बोल रहा है कि जय श्री राम नहीं बोलने पर उसके साथ मारपीट की गई। गणेश ने कहा कि इमरान के साथ हाथापाई निजी दुश्मनी की वजह से हुई थी। इस मामले की पुलिस की शुरुआती जाँच में भी पता चला है कि घटना को अनावश्यक रूप से सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है।

इस मामले की जानकारी देते हुए पुलिस आयुक्त चिरंजीव प्रसाद ने बताया कि कुछ लोग इस घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि जो सबूत सामने आए हैं, वो इस तरफ इशारा नहीं कर रहे। इस घटना के चश्मदीद गवाह गणेश ने भी मारपीट की वजह आपसी दुश्मनी बता रहा है।

आपको बता दें, अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को जबरन जय श्रीराम कहने के लिए मजबूर करने की घटनाएं हाल ही में उत्तरप्रदेश समेत देश के विभिन्न हिस्सों से सामने आई हैं, लेकिन पुलिस जांच में इस बारे में कोई तथ्य नहीं मिल सके और सारी घटनाये फर्जी और फैब्रिकेट की हुई मिली।