लंदन स्थित भारतीय दूतावास के बाहर कल 15 अगस्त पर हजारों पाकिस्तानी मुसलमानों ने कश्मीर पर प्रदर्शन करते हुए हमला बोल दिया। दूतावास के बाहर तिंरगा फहरा कर स्वतंत्रता दिवस मनाने आये भारतीयों पर पथराव किया और बोतले फेंकी। इस दौरान लंदन के पुलिसकर्मी नदारद रहे। भारतीयों ने दूतावास के अंदर घुसकर अपनी जान बचाई।

यह प्रदर्शन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के अजीज दोस्त जुल्फी बुखारी द्वारा बुलाया गया था। आपको बता दें, लंदन के मेयर सादिक खान है और इनके जुल्फी बुखारी से घनिष्ठ सम्बंध हैं। ऐसा माना जा रहा है की भारतीय दूतावास के बाहर पथराव पर सादिक खान की रजामंदी थी। भारतीयों पर पत्थर फेंके गए, बोतलें फेंकी गई, हिंसा की गई और ये सब भारतीय दूतावास के बाहर हुआ। ऐसी घटनाएं बिना स्थानीय प्रशासन की अनुमति के नहीं हो सकती।

आपको बता दें, लंदन जनसांख्यिकी बदलने का सबसे बड़ा उदाहरण है। एक जमाने में ईसाई बहुल होने वाला ये शहर अब ईसाई और मुस्लिमों की लगभग आधी-आधी आबादी में बंट चुका है। लंदन शहर के मेयर मुसलमान होने की वजह से उनका जेहादी मुसलमानों से भावनात्मक सम्बंध हैं। इसी वजह से पिछले कुछ वर्षों में लंदन में मुसलमानों की जेहादी गतिविधियों में तेजी देखी जा रही हैं।

आपको बता दें, ये कोई पहली घटना नहीं है पिछले वर्ष खालिस्तानियों ने भी रेफरेंडम 2020 के बहाने ऐसा काम किया था। चूंकि लंदन में पाकिस्तानी काफी संख्या में हैं इसलिए ISI अपना फंड सही जगह भेजने में सक्षम रहती है। बीबीसी न्यूज़ को मैं पिछले 2-3 वर्ष से देख रहा हूँ, भारत विरोधी लेख इसी वजह से लिखे जाते हैं। ‘द टेलीग्राफ’ की भी यही हालत है। इंग्लैंड बदल रहा है, और यदि भारत सरकार हर बार की तरह हाथ पर हाथ धरे बैठी रहेगी तो इससे बड़ा शर्मनाक कुछ नहीं होगा।

भारत सरकार को इंग्लैंड से पूछना चाहिए कि किसने इतने बड़े हिंसक षड्यंत्र की आज्ञा दी? यदि सही समय पर दूतावास के अंदर भारतीयों को नहीं बुलाया गया होता तो किसी की जान भी जा सकती थी, इसका जिम्मेदार कौन होता? जब लंदन की सड़कों पर खुलेआम आत्मघाती हमलावर ब्लास्ट कर रहे थे, ट्रक चढ़ा रहे थे तब मुझे बहुत अच्छे से याद है लंदन के लोगों ने अपने मेयर का बचाव किया था जबकि इतनी बड़ी सुरक्षा चूक किसी षड्यंत्र के तहत ही हो सकती थी।

पाकिस्तान से ज्यादा मुसलमान भारत में हैं और कल तिरंगा फहराने गए भारतीयों में भी कुछ होंगे, जबकि प्रोटेस्ट करने वाले इंग्लैंड के अलग अलग शहरों से बसों से लंदन आये थे। ये दो तीन दिन पहले से प्लान किया गया पूरा षड्यंत्र था और निसन्देह इसमें लंदन के मेयर सादिक खान की भूमिका संदिग्ध है। भारत सरकार को इंग्लैंड के हाई कमिश्नर को समन करके इसपर स्पष्टीकरण मांगना चाहिए।