पॉन्डिचेरी की गवर्नर और देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी हो गयी ट्विटर पर ट्रोल का शिकार। मामला ये है कि कल हुआ फ्रांस और क्रोएशिया के बीच FIFA वर्ल्ड कप फाइनल। फ्रांस ने फाइनल जीता और किरण बेदी में अतिउत्साह में फ्रांस के समर्थन में ये ट्वीट कर दिया।

ट्वीट में वह लिख गयी कि फ्रांस की जीत पर पुडुचेरी/ पॉन्डिचेरी के लोग बहुत खुश है क्योंकि वहां फ्रांस का राज था कभी। बस ट्वीट होने की देरी थी। लोगो ने कड़ी आपत्ति जताना शुरू कर दी।

एक ट्विटर यूजर लिखते है मैडम हम भारतीय है। आप अपनी पब्लिसिटी के लिए ऐसे ट्वीट करना बंद कीजिए।

एक दिल्ली के निवासी ने ट्वीट किया कि आपको पुडुचेरी के कभी फ्रेंच कॉलोनी होने पर खुशी हो रही है और एक हम थे जो आपको दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे। गौरतलब है कि किरण बेदी 2015 दिल्ली विधान सभा चुनाव में बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री की दावेदार थी।

पुडुचेरी की ही एक मूल निवासी महिला लिखती है की जीत की खुशी जताने के बहुत से तरीके हो सकते है। अपनी गुलामी के प्रतीक को दर्शाते हुए खुशी इज़हार करना कौनसा तरीका हुआ। वह आगे लिखती है की मेरा जन्म पुडुचेरी में हुआ और मुझे तो ऐसा नहीं लगता कि में जीत गयी हूँ।

हां मुझे फुटबॉल पसन्द है पर मुझे जीत की खुशी के लिए गुलामी की मानसिकता के प्रतीकात्मक चिन्ह की जरूरत नहीं।

वही एक ट्विटर यूजर कहते है कि ये एक एन्टी नेशनल ट्वीट है, किरण बेदी को माफी मांगनी चाहिए और ट्वीट डिलीट करना चाहिए। उन्होंने ट्वीट में प्रधान मंत्री मोदी को भी टैग किया।

https://twitter.com/AndColorPockeT/status/1018563071005089792?s=19

वही एक यूजर चुटकी लेते हुए कह रहे है कि अगर इंग्लैंड वर्ल्ड कप जीत जाती तो आरएसएस ने एक दिन का राष्ट्रीय अवकाश घोषित कर दिया होता।

वही अवंतिका सिंह ने लिखा कि, आपका मकसद गलत नही होगा लेकिन आप की इस ट्वीट को आधार बनाकर एन्टी-नेशनल लोग कल को पाकिस्तान का भी समर्थन करने लग जायेंगे।

कई लोगो को यह लग सकता है कि ट्विटर यूजर इस मुद्दे पर ओवर रियेक्ट कर रहे है पर सच्चाई ये की किरण बेदी उसी राजनैतिक दल से आती जिसकी नींव ही सांस्कृतिक राष्ट्रवाद है। अगर वह तमाम राजनैतिक दलों उनके नेताओ और समर्थकों को राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ाते है तो उन्हें इस मुद्दे पर अपनी ही पार्टी के नेता के बयान की भी आलोचना करनी होगी। अगर आप कहते है कि We are a party with a difference तो वह डिफरेंस सिर्फ आपकी कथनी में नहीं करनी में भी दिखना चाहिए तभी आपकी बात में वजन आएगा। किरण बेदी एक सुलझी और पढ़ी लिखी महिला है। उन्होंने सिविल सर्विस की परीक्षा के दौरान पुडुचेरी का पूरा इतिहास पढ़ा होगा पर अतिउत्साह और गुलामी की मानसिकता से बचने की आवश्यकता है ।