साल 2018 के बहुचर्चित कठुआ रेप कांड में जम्मू की एक अदालत ने जम्मू कश्मीर पुलिस के खिलाफ डरा-धमका व टार्चर करके झूठे सबूत तैयार करने के आरोप में मुकदमा दर्ज करने का आदेश दे दिया है।

अदालत ने यह आदेश पुलिस द्वारा विशाल जंगोत्रा के खिलाफ झूठे आरोप लगाने और झूठी चार्जशीट पेश करने पर दिया है। इतना ही नहीं, पुलिस ने विशाल के तीन दोस्तों को भी टार्चर करके जबर्दस्ती झूठे बयान दर्ज किए थे। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि बलात्कार एवं हत्या के दिन विशाल भी घटनास्थल पर मौजूद था और इस कांड में उसका भी बराबर का हाथ था। जबकि विशाल और उसके परिवार वालों के मुताबिक विशाल घटना के दिन उत्तर प्रदेश के मुजफरनगर जिले में मौजूद था। इस बात की पुष्टि एक समाचार चैनल ने भी अपनी रिपोर्ट में की थी।

जी न्यूज़ से बात करते हुए, इस मामले में आरोपी का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता अंकुर शर्मा ने कहा कि उन्होंने अदालत के समक्ष सभी सबूत पेश किए जिसके बाद पुलिस को एसआईटी के सभी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया। कोर्ट ने जम्मू एसएसपी को 7 नवंबर 2019 तक एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।

बता दें कि जनवरी 2018 में जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले में एक 8 वर्षीय बच्ची का बलात्कार करके उसकी हत्या कर दी गई थी, जिसमें एक स्नातक के छात्र विशाल जंगोत्रा, सांझीराम के साथ अन्य 5 युवकों को आरोपी बनाया गया था। इस मामले में पंजाब के पठानकोट की एक विशेष अदालत ने 10 जून, 2019 को अपना फैसला सुनाते हुए विशाल को बरी कर दिया। अन्य 6 आरोपियों में से 3 को उम्रकैद की सजा सुनाई है, जबकि अन्य 3 आरोपियों को 5 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। फैसले के खिलाफ अभियुक्त पक्ष ने जम्मू की ऊपर की अदालत में अपील किया है।