एक दिन पहले हमने आपको बताया था कि कैसे 6 जून 2018 को पुणे पुलिस ने कई शहरों में एक साथ एक वक्त पर धावा बोलते हुए 5 शहरी नक्सलियों को गिरफ्तार कर लिया था, जिनका भीमा-कोरेगांव हिंसा (Bhima-Koregaon violence) में हाथ था।

अब पुणे पुलिस ने एक धमाकेदार खुलासा करते हुए बताया कि रोना विल्सन के घर से मिली सामग्री और ईमेल की जांच करने के बाद इस बात के पक्के सबूत मिले हैं कि माओवादियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की योजना बना रखी थी। पुलिस का कहना है कि माओवादी एक बार फिर देश में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जैसी घटना को अंजाम देने में जुटे थे और इस बार उनका निशाना वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे।

पुलिस ने कहा कि भीमा-कोरेगांव हिंसा के दौरान ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की योजना बनाई गई थी। पुणे पुलिस ने कोर्ट में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रोड-शो के दौरान ही उनकी हत्या एक मानव बम के जरिए की जानी थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि दिल्ली में रोना विलसन के घर से मिली चिट्ठी में एम-4 राइफल और गोलियां खरीदने के लिये आठ करोड़ रुपये की जरूरत की बात लिखी है।

रोना विल्सन के घर से बरामद पत्र की एक प्रति जिसे एएनआई ने ट्वीट किया हैं, उसके अनुसार अगर बीजेपी की चुनावी जीत जारी रहेगी तो वे माओवादियों को गंभीर खतरा पैदा करेंगे। कॉमरेड किशन एवं अन्य वरिष्ठ कॉमरेड ने बेहद मजबूत योजना बनाई है, जिससे मोदी-राज का खात्मा किया जा सकता है। हमें राजीव गांधी की हत्या जैसी घटना को फिर से दोहराने की जरूरत है। वैसे तो यह योजना आत्मघाती लगती है और इसमें हमारे फेल होने की संभावना ज्यादा है, लेकिन पार्टी को हमारे प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उसे मारने के लिए रोड शो (प्रधानमंत्री मोदी का रोड शो) सबसे कारगर तरीका हो सकता है। हमारा विश्वास है कि हम सबके बलिदान से बड़ी हमारी पार्टी का वजूद है।

इंडियन एक्सप्रेस द्वारा दिए गए बायोडाटा के अनुसार, केरल का रहने वाले विल्सन राजनीतिक कैदियों (सीआरपीपी) के रिलीज के लिए समिति का दिल्ली स्थित जनसंपर्क सचिव हैं। रिपोर्ट का दावा है कि वह गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और सशस्त्र बलों (विशेष शक्तियां) अधिनियमों जैसे कानूनों के खिलाफ एक सक्रिय एक्टिविस्ट है। यही रोना विल्सन जेएनयू के प्रतिबंधित छात्र संगठन डीएसयू का नेता था। जेनएयू के आजादी गैंग का सुप्रीम बॉस था यह रोना विल्सन।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि विल्सन दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जीएन साईबाबा का “करीबी सहयोगी” हैं, जिसे मार्च 2017 में उसके माओवादी लिंक और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के कारण और भारत के खिलाफ युद्ध करने के लिए दोषी पाया गया था जिसकी वजह से गडचिरोली सत्र अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है रोना शहरी और जंगल स्थित नक्सलियों के बीच समन्वय का काम करता था।

2011 में रोना विल्सन ने पुलिस पूछताछ में माओवादियों के साथ संबंधों से इनकार करते हुआ कहा था की वह सिर्फ माओवादियों समेत सभी राजनीतिक कैदियों को कानूनी मदद और उनके पुनर्वास संबंधित कार्य करता है। 2005 में, जब वह जेएनयू में पीएचडी कर रहा था तब उसे दिल्ली पुलिस ने बुलाया था और पूर्व दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एसएआर गिलानी के साथ उसके सम्बन्धो के बारे में भी पूछताछ की थी जो 2001 में संसद हमले में आरोपी था और राजद्रोह के लिए गिरफ्तार किया गया था।