कर्नाटक सरकार द्वारा टीपू सुल्तान की जयंती मनाने का  विरोध कर्नाटक समेत देशभर में हो रहा हैं, लोगो का कहना हैं टीपू सुल्तान जैसे जेहादी और इस्लामिक कट्टरपंथी की जयंती मनाने से हिन्दू समाज के बीच गलत संदेश जाएगा, क्योकि उसके हाथ हिन्दुओ के खून से रंगे हैं। ऐसे में विरोधियों को जवाब देने गीतकार जावेद अख्तर ट्विटर पर प्रकट हो गए।

पहले तो जावेद अख्तर ने टीपू सुल्तान को अमेरिका war of independence का मसीहा बता दिया, जिसको लेकर सोशल मीडिया पर उनका मखौल तक उड़ गया। उसके बाद उन्होंने वीर सावरकर का मुद्दा छेड़ कर हमेशा की तरह आरएसएस को टारगेट करने का प्रयास किया। पर जावेद साहब को नहीं मालूम था कि वह आग से खेल रहे है। इसके जवाब में ट्विटर यूजर और लेखक विकास सारस्वत ने जावेद अख्तर की पूर्वजों की कुंडली ट्विटर पर रख दी। जो जावेद अख्तर स्वयं को स्वतंत्रता सेनानी के परिवार का बताते है, जो जावेद अख्तर स्वयं को नास्तिक और सेक्युलर बताते है उनके दादा मौलवी खेरावादी की सारी पोल विकास सारस्वत जी ने जबरदस्त तरीके से ट्विटर पर खोलकर रख दी।

विकास सारस्वत ने ट्वीट कर बताया कि जावेद अख्तर के दादा मौलवी खेरावादी जिनको जावेद क्रांतिकारी और सेक्युलर बताते नहीं थकते थे, उन्होंने कोर्ट में अंग्रेज़ी हुकूमत की खिलाफत करने के लिए माफी तक मांगी थी। जब उनको लखनऊ से अंडमान निकोबार ले जाया जा रहा था तब उन्होंने तत्कालीन गवर्नर जनरल को खत लिखा था अपनी रिहाई के लिए। उन्होंने कसम खाई थी कि वो भविष्य में अंग्रेज़ी हुकूमत का कभी विरोध नहीं करेंगे। उन्होंने कोर्ट में अपने गुनाहों का ठीकरा अपने ही नाम के दूसरे व्यक्ति पर डाल दिया था।

विकास सारस्वत बताते है कि जावेद अख्तर अक्सर संघ पर कट्टरवादी होने का आरोप लगाते आये है पर सच्चाई यह है कि उनके दादा मौलवी खैरावादी ने ही फतवा जारी कर हर एक मुसलमान के लिए जिहाद में हिस्सा लेना अनिवार्य बताया था। क्या जिहादी मानसिकता का व्यक्ति राष्ट्रवादी और सेक्युलर हो सकता है ?

विकास सारस्वत ने ट्वीट कर यह भी कि बताया कि ये खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि स्वयं खैरावादी के माफीनामा अर्जी से हुआ है। मौलवी खैरावादी ने कोर्ट को जमा कराए माफीनामा में यह सब लिखा था। यह माफीनामा बरेली के पूर्व तहसीलदार फजल हक के पास अवश्य होना चाहिए। खैरावादी ने अपने माफीनामा में लिखा था कि आंदोलन से पहले उन्होंने अलवर के महाराजा के पास पांच सालों तक नौकरी की थी, लेकिन इस बीच कुछ समय के लिए वह अपने घर जरूर आए थे लेकिन उन्होंने न तो कहीं नौकरी की न ही किसी बागी से मिले। जब उनका खुद का स्वीकारनामा ऐसा है तो फिर सवाल उठता है कि उन्हें स्वतंत्रता सेनानी किसने और कैसे बना दिया गया?

उद्यमी और लेखक विकास सारस्वत ने अपनी तथ्यो और सबूतों के साथ एक के बाद एक ट्वीट करते हुए जावेद अख्तर के हर झूठ का पर्दाफाश कर डाला। जावेद अख्तर के दादा मौलवी फजल हक खैराबादी की सारी असलियत सबूतों के साथ ट्विटर पर सबके सामने रखते हुए उन्होंने साफ कहा कि, जावेद अख्तर के दादा जिहाद कर रहे थे और कट्टरपंथी मुस्लिम थे, उनका आजादी की लड़ाई से कोई जुड़ाव नही था। जावेद अख्तर विकास सारस्वत के सामने निरुत्तर हो गए और उन्हें ‘संघी लेखक’ कह कर भाग खड़े हुए।

बहरहाल जावेद अख्तर को विकास सारस्वत द्वारा उनके दादा पर उठाए पुख्ता सवालों और सबूतों पर सफाई जरूर देना चाहिए, और उन्हें यह बताना चाहिए कि वह किस मकसद के तहत अपने दादा को स्वतंत्रता सेनानी बताते रहे हैं।

खैर, वामपंथी इतिहासकारों ने हमेशा से धर्म विशेष के प्रति नरम रवैया रखते हुए इतिहास लिखा है। पर आज इंटरनेट के दौर में थोड़ी बहुत जांच पड़ताल और खोजबीन से सच का पता लगाया जा रहा है, जिससे सेक्युलर और लिबरल का लबादा ओढे लोगो के दामन में लगे दाग सामने आ रहे है। जावेद अख्तर साहब को हमारी ये ही सलाह है कि जिनके घर शीशे के होते है वह दूसरों के घर मे पत्थरबाजी न ही करें तो बेहतर है।

जावेद अख्तर के दादा मौलवी फजल हक खैराबादी का पूरा इतिहास यहाँ क्लिक कर पढ़े।